उप्र में पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की एनएचआरसी करे जांच : अजय राय
सं, सलीम रवि कांत
- 30 Jul 2026, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
लखनऊ, 30 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को पत्र लिखकर राज्य में पत्रकारों, डिजिटल मीडियाकर्मियों और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों तथा पुलिस कार्रवाई के बढ़ते चलन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि पूर्व मंत्री राय ने एनएचआरसी से हस्तक्षेप कर यह जांच करने का आग्रह किया है कि क्या पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
आयोग के अध्यक्ष को लिखे पत्र में राय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला हैं।
उन्होंने कहा, ''यदि पत्रकार बिना किसी भय के जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग नहीं कर पाएंगे, तो इससे केवल मीडिया ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही और नागरिकों को प्राप्त अधिकार भी कमजोर होंगे।''
राय ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडियाकर्मियों और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामले राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गए हैं।
उन्होंने इस वर्ष 27 जून को लखनऊ के हजरतगंज थाने में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में भी उनके खिलाफ एक अन्य मामला दर्ज किया गया था।
उन्होंने पत्रकार ममता त्रिपाठी, 'द वायर' के पत्रकारों, 'ऑल्ट न्यूज़' के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर तथा दिवंगत पत्रकार विनोद दुआ से जुड़े मामलों का भी हवाला दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' और 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (सीपीजे) जैसे संगठनों के अलावा वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों, पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी ऐसी कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की है।
बयान के अनुसार, राय ने एनएचआरसी से वर्ष 2020 से उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडियाकर्मियों और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आग्रह किया है।
उन्होंने आयोग से राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक से इस संबंध में समेकित रिपोर्ट तलब करने तथा प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सिफारिशें जारी करने से पहले 'एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया', 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया', 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (सीपीजे) और राज्य के मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठनों से विशेषज्ञ राय लेने का भी अनुरोध किया है।
भाषा
सं, सलीम रवि कांत
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