ओडिशा के मंत्री ने राज्य के भाजपा नेताओं के दिल्ली में 'दावत उड़ाने' संबंधी दावे को किया खारिज
सुभाष
- 31 Jul 2026, 02:23 PM
- Updated: 02:23 PM
भुवनेश्वर, 31 जुलाई (भाषा) ओडिशा के मंत्री सुरेश पुजारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर नवीन पटनायक के तंज का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी राष्ट्रीय राजधानी में छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद का समाधान निकालने की कोशिश कर ''राजधर्म'' निभा रहे थे।
विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, ''क्या ओडिशा में बाढ़ की तबाही के बीच राज्य के भाजपा नेता दिल्ली में दावत उड़ा रहे हैं? एक ओर जहां लगातार भारी बारिश के कारण पूरा राज्य बाढ़ से प्रभावित है, वहीं मुख्यमंत्री और भाजपा के बड़े नेता एवं सांसद इस समय दिल्ली में हैं।''
माझी बृहस्पतिवार को दिल्ली में थे, जहां उन्होंने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में महानदी जल बंटवारा और प्रबंधन पर हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए।
ओडिशा में घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के कारण 'हाई अलर्ट' होने के बावजूद माझी के गैर-मौजूद रहने को भुनाने की कोशिश करते हुए विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर इस आपदा से निपटने में गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया था।
पटनायक के तंज पर पलटवार करते हुए, राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि सरकार की आलोचना करने से पहले उन्हें जमीनी हालात को समझना चाहिए।
पुजारी ने कहा कि मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद पर त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली गए हैं, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे नवीन पटनायक की पूर्ववर्ती बीजद सरकार सुलझाने में नाकाम रही थी।
उन्होंने कहा, ''बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने की। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने अपने मुख्य सचिवों एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में हिस्सा लिया।''
उन्होंने यह भी कहा कि माझी ''राजधर्म'' का पालन कर रहे थे।
पुजारी ने पटनायक से सवाल किया, ''ओडिशा के लोगों ने उन्हें लगभग 25 साल तक मुख्यमंत्री बनाये रखा। लेकिन जब राज्य को नेतृत्व की जरूरत है, तो वह अभी कहां हैं?''
मंत्री ने उत्तरी ओडिशा में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और बृहस्पतिवार को समीक्षा बैठकें कीं।
भाषा राजकुमार सुभाष
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