मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य के कारण करतारपुर गलियारा 'बंद' रखना पड़ रहा : सरकार
अविनाश
- 31 Jul 2026, 10:12 PM
- Updated: 10:12 PM
नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि उसे सिख धार्मिक समूहों और संगठनों से श्री करतारपुर साहिब गलियारा को ''जल्द फिर खोलने'' के लिए अनुरोध मिले हैं, लेकिन मौजूदा सुरक्षा हालात के कारण इसे ''बंद'' रखना पड़ रहा है।
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह बात कही।
विदेश मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार को सिख समुदाय के नेताओं, सांसदों और नागरिक समाज से इस गलियारे को ''जल्द फिर से खोलने'' के अनुरोध मिले हैं, क्योंकि इसका बहुत अधिक धार्मिक और भावनात्मक महत्व है।
सिंह ने कहा, ''भारत सरकार और पाकिस्तान सरकार के बीच 24 अक्टूबर 2019 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मकसद तीर्थयात्रियों की लंबे समय से चली आ रही उस मांग को पूरा करना था जिसके तहत वे गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर (पाकिस्तान) तक आसानी से और निर्बाध पहुंच सकें। साथ ही, गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के मौके पर गलियारे को चालू किया जा सके।''
अक्टूबर 2024 में इस समझौते को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया।
मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार को पाकिस्तान के फारूकाबाद में 125 साल पुराने गुरुद्वारे के एक हिस्से को ढहाये जाने की जानकारी है। सरकार ने इस्लामाबाद से इस मामले की जल्द जांच करने और इस ''घिनौनी हरकत'' के दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है।
सिंह ने कहा, ''सरकार को पाकिस्तान के फारूक़ाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के एक हिस्से को तोड़े जाने की जानकारी है। सरकार ने इस हरकत की कड़ी निंदा की है और पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह इस मामले की जल्द से जल्द जांच करे और इस घिनौनी हरकत को अंजाम देने वालों को सज़ा दिलाए।''
उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार के समक्ष ''अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की कम से कम 550 बड़ी घटनाओं का मुद्दा उठाया है, जिनमें धार्मिक स्थलों की बेअदबी के 31 मामले भी शामिल हैं।''
सिंह ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए अमेरिका से मिली सशर्त छूट 26 अप्रैल को खत्म हो गई और सरकार इस घटनाक्रम के असर से निपटने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है।
उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह संबंधी योजना अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए ज़रूरी 'कनेक्टिविटी' मुहैया कराने, साथ ही मध्य एशिया के साथ भारत के व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के मकसद से बनाई गई थी।
भारत सरकार की कंपनी, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री ज़ोन के ज़रिए 2018 से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है।
भाषा सुभाष अविनाश
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