पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी, राज्यों में बनेंगी त्वरित अदालतें
दिलीप
- 01 Aug 2026, 05:10 PM
- Updated: 05:10 PM
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक मामलों में आरोपियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई के लिए राज्यों को विशेष त्वरित अदालतें गठित करने का अधिकार देने तथा सजा को और कड़ा करने वाले संशोधित कानून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है।
शुक्रवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, विधि मंत्रालय ने बताया कि संसद के दोनों सदनों से इस सप्ताह पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मंजूरी दे दी है।
संशोधित कानून के तहत अब प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
कानून के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषियों को कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संगठित अपराध के मामलों में संशोधित कानून में न्यूनतम सात वर्ष के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) -2026 प्रश्नपत्र लीक को लेकर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच इस विधेयक को जल्द पारित कराने पर जोर दिया था।
यह नया कानून दो वर्ष पुराने अधिनियम में संशोधन करते हुए जुर्माने की राशि बढ़ाता है और प्रश्नपत्र लीक के दोषियों के लिए अधिक कठोर दंड का प्रावधान करता है।
हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस कानून और त्वरित सुनवायी अदालतों के गठन का आश्वासन दिया था।
कानून में 15 तरह के अवैध कृत्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट तैयार करना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल हैं।
वर्ष 2024 का मूल कानून उस समय लाया गया था, जब सरकार प्रश्नपत्र लीक के कई विवादों का सामना कर रही थी। वर्ष 2024 के कानून से पहले केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित लोक परीक्षाओं में अपनाए जाने वाले अनुचित साधनों तथा संबंधित अपराधों से निपटने के लिए कोई विशेष व्यापक कानून नहीं था।
पूर्व अधिनियम का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) तथा अन्य द्वारा आयोजित लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाना था।
संशोधित कानून के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित सुनवायी अदालतें गठित करने का निर्देश दिया जाएगा। इन अदालतों को आरोप-पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा।
भाषा अमित दिलीप
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