प्रदर्शन में इस्तेमाल हुई भाषा के लिए माफी नहीं मांगेंगे, पुलिस कार्रवाई का जवाब दें:आइसा अध्यक्ष
माधव
- 01 Aug 2026, 05:10 PM
- Updated: 05:10 PM
(अंजलि ओझा)
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) शिक्षा सुधारों के लिए जंतर-मंतर पर 23 दिन तक भूख हड़ताल करने वालीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने केंद्र सरकार के खिलाफ कई प्रदर्शनकारियों की अपशब्दों वाली आलोचनाओं के लिए माफी मांगने या उनकी निंदा करने से मना कर दिया।
उन्होंने आलोचकों पर आरोप लगाया कि वे 20 जुलाई की कार्रवाई के दौरान पैलेट गन और पुलिस बल के कथित इस्तेमाल से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेहा ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की कोशिशों के साथ-साथ शाह के इस्तीफे और दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को हटाने की मांग भी जारी रहेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जवाबदेही सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों तक ही सीमित नहीं रह सकती।
भाकपा (माले) लिबरेशन से जुड़े वामपंथी छात्र संगठन की प्रमुख नेहा ने 20 जुलाई को संसद तक हुए मार्च के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन और पुलिस बल के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यह बताने में नाकाम रही कि सुरक्षाकर्मियों के पास पैलेट गन और ''कीलों वाली लाठियां'' क्यों थीं।
उन्होंने पूछा, ''हम अब भी जवाब मांग रहे हैं। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया? सुरक्षा बलों को पैलेट गन क्यों दी गईं? कीलों वाली लाठियां क्यों इस्तेमाल की गईं, जिनसे प्रदर्शनकारी घायल हुए?''
नेहा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों की भाषा को लेकर हो रहे विवाद का इस्तेमाल 20 जुलाई को संसद मार्च वाले दिन पुलिस की कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने के मुद्दे को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म होने के बाद से ही, प्रदर्शनकारियों द्वारा अपशब्दों के इस्तेमाल के वीडियो ने राजनीतिक ध्यान खींचा है और कई लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी हुई है।
ऐसी ही एक प्रदर्शनकारी 15 वर्षीय रुचिका सिंह है, जिसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तीखी और अपशब्दों वाली आलोचना की, जिससे वह विवाद के केंद्र में आ गई और उसके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गईं।
छात्र नेता ने कहा, ''आपको अपशब्दों का इस्तेमाल इतना बुरा लगता है। क्या आपको तब बुरा नहीं लगा जब धर्मेंद्र प्रधान ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को 'आतंकवादी' कहा? क्या आपने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई? जब भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने हमें वायरस कहा, तो क्या किसी ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई?''
नेहा ने कहा कि भाषा नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों को लगी चोटों पर बात होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''सबसे पहले तो, जो लोग हमसे अपशब्दों के इस्तेमाल की निंदा करने को कहते हैं, उनसे मैं माफी चाहती हूं। हम आपका यह खेल नहीं खेलेंगे। आप यह खेल इसलिए खेल रहे हैं क्योंकि हम अमित शाह से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। हम पुलिस आयुक्त से जवाबदेही मांग रहे हैं। आपको लगता है कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल एक छोटा मुद्दा है और रुचिका का बयान एक बड़ी समस्या है।''
आइसा अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि राजनेताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों की वैसी जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई।
नेहा ने कहा, ''जब आपके लोग संसद से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, और जब आरएसएस का कोई विचारक कहता है कि 'बलात्कार पसंद करने वाली औरतें जंतर-मंतर पर विरोध कर रही थीं', तो वह आपको अपमानित करने वाला या गलत नहीं लगता।''
उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के बाद उन्हें और रुचिका सिंह को सोशल मीडिया पर बलात्कार की कई धमकियां मिलीं।
नेहा ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए उन्हें जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें की जा रही हैं।
नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों का आरोप है कि 20 जुलाई को उनके शांतिपूर्ण मार्च के दौरान पुलिस ने उन पर अत्याधिक बल प्रयोग किया, जिसमें पैलेट गन का इस्तेमाल भी शामिल था।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की।
भाषा शफीक माधव
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