कॉलेजियम का सिफारिश की वजह नहीं बताना न्यायाधीशों के साथ अन्याय: न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां
माधव
- 01 Aug 2026, 06:23 PM
- Updated: 06:23 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) न्यायिक नियुक्तियां करने के पीछे के कारण नहीं बताए जाने को लेकर कॉलेजियम की आलोचना करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने शनिवार को कहा कि ऐसा नहीं करने से उन न्यायाधीशों के लिए जगह बनती है, जो किसी समूह के लोगों को "चींटी" बताने जैसी असंवैधानिक टिप्पणियां करते हैं।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा, "मैंने देखा है कि कॉलेजियम के पिछले तीन प्रस्तावों में कोई कारण नहीं बताया गया है। क्या यह पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने जैसा कदम है?"
कानूनी विशेषज्ञ संस्था 'विधि' की पहल 'जेएएलडीआई' की एक रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर आयोजित परिचर्चा में न्यायमूर्ति भुइयां ने इस बात पर जोर दिया कि पदोन्नति या नियुक्ति के कारणों का खुलासा न करने से अयोग्य उम्मीदवार न्यायपालिका में आ सकते हैं।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा, "कारण न बताकर, संस्थान असल में उन कई न्यायधीशों का नुकसान करता है जो सचमुच बेहतरीन हैं और जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया है।"
उन्होंने कहा, "इसके उलट, कारण न बताने से हम न्यायपालिका में ऐसे लोगों के आने की गुंजाइश भी बनाते हैं जो बाद में लोगों के समूहों को 'चींटियां' कह सकते हैं और ऐसी अन्य टिप्पणियां कर सकते हैं जो पूरी तरह से असंवैधानिक और संविधान के मूल्यों के खिलाफ हों।"
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए "कुछ चर्चा होनी चाहिए और कुछ कारण बताए जाने चाहिए"।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि हाल ही में एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने ऐसी टिप्पणी की थी।
भुइयां ने हालांकि किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने 2024 में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में अपनी टिप्पणी से हंगामा खड़ा कर दिया था, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने उनके "घृणा भाषण" के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा, "अपने देश में हमें सिखाया जाता है कि छोटे-से-छोटे जीव को भी नुकसान न पहुंचाएं, चींटियों को भी न मारें, और यह बात हमारे मन में गहराई से बैठ जाती है। शायद इसीलिए हम सहनशील और दयालु होते हैं; जब दूसरे दुख में होते हैं, तो हमें भी दर्द महसूस होता है। लेकिन आपकी संस्कृति में, बच्चों को कम उम्र से ही जानवरों को मारे जाने का दृश्य दिखाया जाता है। ऐसे में आप उनसे सहनशील और दयालु होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?"
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के पिछले तीन बयानों में न्यायाधीशों की पदोन्नति की सिफारिश करने का कोई कारण नहीं बताया गया था।
उन्होंने कहा, "कुछ लोग तो यह भी कह सकते हैं कि वे कुछ हद तक एक ही ढर्रे पर आधारित या "हूबहू उठाकर रखने" जैसे थे। लेकिन कम से कम उन सुझावों को सही ठहराने के लिए कुछ कारण तो बताए गए थे।"
हाल के महीनों में, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कुछ लोगों को "कॉकरोच" कहकर विवाद खड़ा कर दिया, जिससे "कॉकरोच जनता पार्टी" नाम का एक ऑनलाइन आंदोलन शुरू हुआ, जिसने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
कॉलेजियम व्यवस्था की आलोचना का जिक्र करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने पहले कहा था कि जब कॉलेजियम उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करता है, तो कई बातों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे कि उनका कामकाज, न्यायाधीश के तौर पर काम करने की अवधि, पहले संभाले गए पद और यहां तक कि उनका पेशेवर जीवन भी।
भाषा प्रशांत माधव
माधव
0108 1823 दिल्ली