नये सीएपीएफ अधिनियम के प्रावधानों को कैडर अधिकारियों ने न्यायालय में दी चुनौती
माधव
- 01 Aug 2026, 06:37 PM
- Updated: 06:37 PM
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों के एक समूह ने हाल में लागू किए गए सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम की कुछ धाराओं को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। उनका कहना है कि यह कानून उनके करियर में प्रगति के अवसरों को सीमित करता रहेगा। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
अधिकारियों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सहित पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लगभग 3,000 संवर्ग (कैडर) अधिकारियों ने याचिकाएं दाखिल की हैं।
उन्होंने बताया कि ये याचिकाएं संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई हैं, जो नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें ''मजबूर होकर'' शीर्ष अदालत का रुख करना पड़ा, क्योंकि उन्हें लगता है कि नये कानून से उन्हें न्याय नहीं मिला और मई 2025 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।
उनका कहना है कि उन्हें लगता है कि नया अधिनियम सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में लंबे समय से चली आ रही रुकावट और करियर में ठहराव की समस्या का समाधान नहीं करेगा। याचिकाकर्ताओं में शौर्य पदक विजेता और कुछ महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने अदालत से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की धारा 3 और 4 को संविधान के विपरीत घोषित करने तथा केंद्र सरकार को मई 2025 के उच्चतम न्यायालय के फैसले को पूरी तरह लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने 23 मई, 2025 को अपने फैसले में कहा था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को दो वर्ष की अवधि में क्रमिक रूप से कम किया जाए, ताकि कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकें जिनकी पदोन्नति में देरी से इन बलों का मनोबल ''प्रतिकूल रूप से'' प्रभावित हो सकता है।
शीर्ष अदालत ने बाद में इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की एक पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने संसद में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश किया, जिसे अप्रैल में अधिनियम के रूप में अधिसूचित किया गया।
इस अधिनियम की धारा 3 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती और सेवा शर्तों के विनियमन से संबंधित है, जबकि धारा 4 केंद्र सरकार को अनुसूचियों में संशोधन का अधिकार देती है।
सूत्रों के अनुसार इन अधिकारियों ने यह अनुरोध किया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) स्तर के पदों को केवल आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने के बजाय, निर्धारित पात्रता के आधार पर संबंधित बलों के संवर्ग (कैडर) अधिकारियों के लिए भी उपलब्ध कराया जाए।
सरकार का कहना है कि इस अधिनियम का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सभी कर्मियों की सेवा शर्तों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिससे कैडर अधिकारियों और आईपीएस से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों के लिए अलग-अलग सेवा नियमों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त हो सके।
भाषा अमित माधव
माधव
0108 1837 दिल्ली