जम्मू कश्मीर आतंकी हमला: हमलावरों की तलाश जारी, मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि
नेत्रपाल
- 01 Aug 2026, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
श्रीनगर, एक अगस्त (भाषा) जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में एक दिन पहले दो प्रवासी मजदूरों की हत्या करने वाले आतंकवादियों का पता लगाने के लिए सुरक्षाबलों ने शनिवार को तलाश अभियान तेज कर दिया। वहीं, सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने घटना की गहन जांच की मांग की।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यहां पुलिस प्रमुख और अन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने सुरक्षाबलों को निर्देश दिया कि वे आतंकवादियों को खत्म करने के लिए अभियान तेज करें।
सिन्हा ने सभी उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए लागू मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की व्यापक समीक्षा करने का भी निर्देश दिया।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और पुलिस व अन्य सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने बताया कि घाटी के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है तथा लोगों और वाहनों की जांच सख्त कर दी गई है।
दक्षिण कश्मीर में कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले में बीस वर्ष से अधिक आयु के दो प्रवासी मजदूर दीपक रात्रे और भूपिंदर की मौत हो गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों मजदूरों का अंतिम संस्कार जिले के पलपोरा क्षेत्र में उनके परिजनों तथा पुलिस और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने हत्या की जांच की मांग करते हुए कहा कि जब भी जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग उठती है, तब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
अब्दुल्ला ने बारामूला जिले में पत्रकारों से कहा, ''मुझे इसका अफसोस है। हमें यह भी नहीं पता कि उन्हें किसने मारा। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि हत्यारा कौन हैं।''
घटना के समय पर सवाल उठाते हुए तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ''मुझे समझ नहीं आता कि जब भी हम राज्य का दर्जा मांगते हैं, तब ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं।''
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह घटना ''सुरक्षा में चूक'' का परिणाम है।
महबूबा ने जांच की मांग करते हुए कहा, ''यह सिलसिला रुकना चाहिए। भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद (जिससे स्थानीय लोगों को बहुत परेशानी होती है) ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। मेरी नजर में, कहीं न कहीं सुरक्षा में चूक हुई है।''
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में कानून-व्यवस्था संभालने वाले उपराज्यपाल प्रशासन को इस बात की जांच करनी चाहिए कि जारी अमरनाथ यात्रा के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद यह हमला कैसे हुआ।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों प्रवासी मजदूरों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। यह जिला प्रशासन द्वारा घोषित छह-छह लाख रुपये की तत्काल सहायता के अतिरिक्त है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''उन्होंने (मुख्यमंत्री) मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। यह राशि जिला प्रशासन द्वारा दी जाने वाली छह-छह लाख रुपये की तत्काल सहायता के अतिरिक्त होगी।''
कश्मीर के धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक और राजनीतिक दलों ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अमानवीय, बर्बर और कायरतापूर्ण बताया तथा हिंसा खत्म करने की अपील की।
भाषा
शुभम नेत्रपाल
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