डीएलटीए ने खन्ना पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया, एआईटीए ट्रस्ट से 39 करोड़ रुपये की वसूली की मांग
मोना
- 04 Aug 2026, 04:47 PM
- Updated: 04:47 PM
... अमनप्रीत सिंह ...
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) दिल्ली लॉन टेनिस संघ (डीएलटीए) ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष अनिल खन्ना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने कथित अवैध समझौतों के जरिए एआईटीए ट्रस्ट को डीएलटीए स्टेडियम के किराये से करोड़ों रुपये प्राप्त करवाए।
इसके साथ ही खन्ना से जुड़ी कंपनियों और एआईटीए ट्रस्ट के बीच हुए भूमि सौदे भी जांच के घेरे में आ गए हैं। भूमि हस्तांतरण में देरी के कारण खन्ना द्वारा ट्रस्ट को 1.60 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में जमा कराए जाने से विवाद और गहरा गया है।
खन्ना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रस्ट को 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया, लेकिन यह किसी वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता की स्वीकारोक्ति नहीं थी।
खन्ना ने बताया कि गुरुग्राम स्थित उस भूमि के संबंध में यह राशि चुकाई गई, जहां कभी राष्ट्रीय टेनिस अकादमी (एनटीए) संचालित होती थी। यह भूमि उनकी कंपनियों आरएलएफ लिमिटेड और यूएलआईएल लिमिटेड ने ट्रस्ट को बेच दी थी, लेकिन स्वामित्व हस्तांतरण में देरी होने के कारण ट्रस्ट ने ब्याज की मांग की थी।
रोहित राजपाल के नेतृत्व वाली डीएलटीए ने वर्ष 2006 से 2023 के बीच एआईटीए ट्रस्ट को दिए गए लगभग 39 करोड़ रुपये, उस पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस दिलाने की मांग की है।
इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद एआईटीए ट्रस्ट के संचालन, वित्तीय निर्णयों और हितों के टकराव को लेकर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं।
डीएलटीए ने 14 जुलाई को भेजे नेटिस में आरोप लगाया कि एआईटीए ट्रस्ट आर.के. खन्ना टेनिस स्टेडियम (अब डीएलटीए स्टेडियम) के विभिन्न हिस्सों से होने वाली किराया आय का ' धोखाधड़ी कर ' लाभ उठा रहा था, जबकि यह आय वास्तव में डीएलटीए की थी।
डीएलटीए का आरोप है कि अनिल खन्ना ने एक ही समय में एआईटीए ट्रस्ट के अध्यक्ष, डीएलटीए के अध्यक्ष और एआईटीए के अध्यक्ष जैसे तीन महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया।
उनके अनुसार दो अप्रैल 2014 और एक जून 2017 को किए गए समझौतों के माध्यम से ट्रस्ट को स्टेडियम की किराया आय में हिस्सेदारी दिलाई गई जो संस्था के हितों के खिलाफ थे।
डीएलटीए के मुताबिक जनवरी 2023 में इन समझौतों को समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद ट्रस्ट को सभी भुगतान रोक दिए गए।
एआईटीए ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन ने डीएलटीए के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, '' यह डीएलटीए का पक्ष है। संबंधित समझौतों के तहत ट्रस्ट का दावा पूरी तरह वैध है। अब इस विवाद का निपटारा मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के जरिए होगा। वास्तव में हमारा मानना है कि ट्रस्ट पर डीएलटीए का नहीं, बल्कि डीएलटीए पर ट्रस्ट का बकाया है।''
सूत्रों के अनुसार, डीएलटीए को सरकारी स्वीकृत किराया समझौतों से हर महीने लगभग आठ करोड़ रुपये की आय होती है। संस्था में करीब 140 कर्मचारियों का स्टाफ कार्यरत है।
एक वित्तीय विशेषज्ञ ने दावा किया कि डीएलटीए से एआईटीए ट्रस्ट को धन हस्तांतरित करने की व्यवस्था इसलिए बनाई गई क्योंकि डीएलटीए करदाता संस्था है, जबकि आयकर कानून के एक प्रावधान के तहत ट्रस्ट को कर छूट प्राप्त है। उनके अनुसार, ''इससे ट्रस्ट की आय करमुक्त हो जाती थी और इसे 'कर बचाव' के रूप में भी देखा जा सकता है।''
दूसरी ओर पीटीआई को मिले दस्तावेजों के अनुसार एआईटीए ट्रस्ट के अध्यक्ष रहते हुए अनिल खन्ना ने गुरुग्राम में अपनी ही कंपनियों आरएलएफ लिमिटेड और यूएलआईएल लिमिटेड से भूमि खरीद की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाई। ये कंपनियां पहले उनके नियंत्रण में थीं और अब उनके परिवार से जुड़ी मानी जाती हैं।
जैन से खन्ना से मिली ब्याज के रकम के बारे में पूछे जाने पर कहा, '' ट्रस्ट ने काफी भूमि के लिए काफी पहले ही भुगतान कर दिया था लेकिन इसके हस्तांतरण पर काफी विलंब हुआ। ऐसे में ट्रस्ट ने बयाज के तौर पर खन्ना से 1.60 करोड़ रूपये की वसूली की। यह राशि किसी वित्तीय अनियमितता के दंड के रूप में नहीं, बल्कि भूमि हस्तांतरण में देरी के कारण वसूले गए ब्याज के रूप में ली गई।''
खन्ना ने स्वीकार किया कि उनके कार्यकाल में 'कुछ गलतियां' हुई होंगी, लेकिन उन्होंने कभी ट्रस्ट के धन का दुरुपयोग नहीं किया। उनका कहना था कि लगभग 15 वर्षों तक ट्रस्ट ने उनकी भूमि पर बिना किसी किराये के राष्ट्रीय टेनिस अकादमी संचालित की। बाद में ट्रस्ट ने प्रस्ताव पारित कर बाजार मूल्य से कम दर पर भूमि खरीदने का निर्णय लिया।
जब यह पूछा गया कि एआईटीए ट्रस्ट ने अपनी भूमि पर टेनिस कोर्ट विकसित करने के बजाय टेनिस गतिविधियों के लिए आरएलएफ की जमीन का उपयोग क्यों किया, तो खन्ना ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, 'इस पर मैं क्या कहूं।'
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 में राष्ट्रीय टेनिस अकादमी (एनटीए) के संचालन को लेकर एआईटीए ट्रस्ट और आरएलएफ लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
कोविड-19 महामारी के बाद राष्ट्रीय टेनिस अकादमी का संचालन बंद हो गया। इसके बावजूद वर्ष 2021 में एआईटीए ट्रस्ट ने खन्ना की एक अन्य कंपनी यूएलआईएल लिमिटेड से लगभग तीन करोड़ रुपये में अतिरिक्त भूमि खरीदी।
भाषा
आनन्द मोना
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