छात्रों के खिलाफ हिंसा के लिए शाह जिम्मेदार, संसद में जवाब देने का साहस नहीं : राहुल
दिलीप
- 05 Aug 2026, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में हाल में हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कुछ युवाओं से बुधवार को मुलाकात की और आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं।
गांधी ने इन युवाओं के संग संवाददाताओं के साथ बातचीत में दावा किया कि गृह मंत्री में यह बुनियादी शिष्टाचार और साहस नहीं है कि 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ हुई ''हिंसा'' के मामले पर संसद में पहुंचकर जवाब दें।
मुंबई की रिया अहीर, जंतर मंतर के विरोध प्रदर्शन में शमिल रहीं मुस्कान शर्मा, उत्तर प्रदेश की फरहा नाज, झारखंड की नूतन टप्पो तथा कुछ अन्य युवाओं से राहुल ने मुलाकात की।
राहुल गांधी ने कहा, ''छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए भारत के गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उनमें न तो संसद में आकर इस मुद्दे पर बोलने का शिष्टाचार है और न ही यह बताने का साहस कि आखिर क्या हुआ।''
उन्होंने कहा, ''इस मामले में दो ही संभावनाएं हो सकती हैं। पहली, उन्हें (शाह) यह जानकारी नहीं थी कि बच्चों के खिलाफ हिंसा हुई है। ऐसी स्थिति में वह अक्षम हैं। दूसरी, यदि उन्होंने बच्चों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश दिया, तो ऐसी स्थिति में वह दोषी हैं।''
राहुल गांधी ने कहा कि दोनों ही स्थितियों में गृह मंत्री जिम्मेदार हैं।
उन्होंने दावा किया कि युवाओं ने उन्हें बताया कि उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें प्रताड़ित किया गया और धमकियां दी गईं।
उन्होंने कहा, ''मुझे इन युवाओं और उन हजारों नौजवानों पर गर्व है, जिन्होंने संविधान, भारत की अवधारणा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाई। शिक्षा व्यवस्था की खामियों और उसकी विफलताओं के खिलाफ आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।''
राहुल गांधी ने कहा कि देश को बेहतर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर रोक और युवाओं के सुरक्षित भविष्य की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''आज युवा मीडिया के सामने खड़े हैं, लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री में यहां आकर खड़े होने का साहस नहीं है।''
उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने उत्पीड़न, हिंसा और प्रताड़ना का सामना करने के बावजूद अपने अनुभव सार्वजनिक किए हैं और देश को ऐसे ही साहसी युवाओं की आवश्यकता है।
इस संवाददाता सम्मेलन में मौजूद मुबई की युवती रिया अहीर ने याद दिलाया कि उन्होंने मुंबई में पुलिस की एक वैन के सामने खड़े होकर रोका था।
रिया ने कहा, ''मैंने 20 छात्रों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने से रोका था। इसके बाद से मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है, जो अपने आप में अपराध है।''
रिया का कहना था कि उन्होंने 27 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन 5 अगस्त तक भी उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
रिया ने कहा, ''मुझे खुशी है कि जिन युवाओं के लिए मैं खड़ी हुई थी, आज वे सभी मेरे साथ खड़े हैं।''
इस संवाददाता सम्मेलन में मौजूद मुस्कान शर्मा ने आरोप लगाया कि आंदोलन में भाग लेने के बाद से उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि उनके बारे में यह प्रचारित किया गया कि वह मुस्लिम हैं और इसी आधार पर उन्हें देशविरोधी बताने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा, ''आज ऐसा विमर्श बनाया जा रहा है कि यदि कोई मुस्लिम है, तो वह देशविरोधी है।''
मुस्कान ने 20 जुलाई की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जब वह शांतिपूर्ण ढंग से मार्च कर रही थीं, तब पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया।
मुस्कान ने यह भी दावा किया कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के एक पुरुष अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने उनके निजी अंग पर लाठी मारने का प्रयास किया।
मुस्कान ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी अथवा उसे ऐसा करने का निर्देश देने वाला व्यक्ति सार्वजनिक रूप से माफी मांग ले, तो उन्हें खुशी होगी।
भाषा हक राखी दिलीप
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