संभल हिंसा पूर्व नियोजित साजिश थी: उप्र विस में पेश न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
धीरज
- 05 Aug 2026, 08:07 PM
- Updated: 08:07 PM
लखनऊ, पांच अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में बुधवार को पेश की गई जिसमें हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश करार दिया गया है और पुलिस तथा प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की गई है।
न्यायिक आयोग की करीब 370 पृष्ठों की रिपोर्ट में दावा किया है कि पुलिस और प्रशासन की विवेकपूर्ण कार्रवाई की वजह से राज्य और देश में सांप्रदायिक दंगे नहीं भड़के।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2024 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन (पूर्व डीजीपी) को शामिल किया गया था।
संभल जिले में एक स्थानीय अदालत ने 2024 में एक हिंदू श्रद्धालु द्वारा दायर मुकदमे पर शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। याचिका में दावा किया गया था कि यह मस्जिद प्राचीन हरिहर मंदिर के स्थान पर बनाई गई है।
सर्वेक्षण के दूसरे चरण के दौरान, 24 नवंबर 2024 को लोगों का एक समूह हिंसक हो गया और उनकी सुरक्षाकर्मियों से झड़प हो गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। हिंसा के संबंध में 12 प्राथमिकी दर्ज की गईं।
विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार 24 नवंबर, 2024 की घटना पूर्व नियोजित थी और यह प्रमुख रूप से संभल के (समाजवादी पार्टी) सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सोहेल इकबाल, इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद के सदर जफर अली, कासिम अली एडवोकेट, इंतजामिया कमेटी के सचिव मशहूद अली फारुखी एडवोकेट और लद़दन खान और इंतजामिया कमेटी के अन्य सदस्यों द्वारा रची गई साजिश और उकसावे का परिणाम थी। रिपोर्ट के मुताबिक सांसद और स्थानीय विधायक के पुत्र तथा अन्य अधिवक्ता हरिशंकर जैन द्वारा दायर उस याचिका से नाराज थे, जिसमें दावा किया गया था कि 1526 से 1529 में हिंदू बेग द्वारा मुगल शासक बाबर के आदेश पर मंदिर के स्थान पर जामा मस्जिद बनाई गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय अदालत द्वारा जामा मस्जिद के सर्वे के लिए 19 नवंबर 2024 को दिये आदेश से भी नाराजगी थी और वे लोग मस्जिद में किसी अन्य का हस्तक्षेप नहीं चाहते थे। इसी वजह से 19 नवंबर को उन लोगों ने सर्वेक्षण की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ''सांसद बर्क ने हिंदुओं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह का माहौल बनाया और मुस्लिम समाज को यह भ्रामक जानकारी दी कि जामा मस्जिद खतरे में है, हिंदू, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में इसे ध्वस्त करने जा रहे हैं।''
रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 नवंबर 2024 को बर्क और सोहेल इकबाल द्वारा घटना में सक्रिय भूमिका निभाई गई और लोगों को उकसाया गया।
न्यायिक आयोग ने कहा है कि घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सराहनीय प्रबंध किये। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक और जिले के अन्य अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति के कारण संभल शहर को न केवल सांप्रदायिक हिंसा से बचाया गया बल्कि 24 नवंबर 2024 को सर्वे की कार्यवाही के दौरान हिंसक भीड़ को जामा मस्जिद में प्रवेश करने से रोककर सर्वे टीम को भी किसी भी नुकसान से बचाया गया।
आयोग ने कहा कि भीड़ द्वारा पुलिस के हथियारों को लूटने और सुरक्षाकर्मियों पर जानलेवा किये जाने के बावजूद पुलिस ने संयम बरता और आग्नेय अस्त्र का उपयोग नहीं किया। इसकी पुष्टि विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा की बैलिस्टिक विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट में भी पुष्टि की गई।
आयोग ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की विवेकपूर्ण कार्रवाई के जरिये उपद्रवियों को पूरे राज्य और देश में सांप्रदायिक दंगे भड़काने से रोका गया।
न्यायिक आयोग ने घटना में मारे गए चार लोगों के बारे में कहा कि उनकी मौतें पुलिस की गोली से नहीं हुई। इस घटना में 28 पुलिसकर्मियों के घायल होने का जिक्र हैं जिसमें पुलिस अधीक्षक समेत कई अधिकारी शामिल थे। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी सुझाव दिए हैं।
भाषा आनन्द पारुल धीरज
धीरज
0508 2007 लखनऊ