सरकार की परिसीमन विधेयक पर नयी पहल, कांग्रेस से साधा संपर्क
अविनाश
- 05 Aug 2026, 09:26 PM
- Updated: 09:26 PM
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में पारित कराने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इसके तहत उसने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तथा सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों से संपर्क साधा है।
सूत्रों के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर प्रस्तावित विधेयक को दोबारा पेश करने के मुद्दे पर चर्चा की। हालांकि कांग्रेस की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई।
सरकार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और द्रमुक नेतृत्व से भी इस विषय पर बात करने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार विधेयक में कुछ संशोधन कर दक्षिणी राज्यों की आशंकाएं दूर करने का प्रयास कर सकती है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत प्रत्येक राज्य की मौजूदा लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान शामिल किया जा सकता है, ताकि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान किया जा सके।
सरकार का प्रस्ताव 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा की कुल सीटों को 816 तक बढ़ाने तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का है।
इससे पहले, अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पक्ष में सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी थी। लोकसभा में इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे।
लोकसभा में राजग की वर्तमान संख्या 299 है। यदि सभी 20 एनसीपीआई सांसद समर्थन करते हैं तो सरकार के पक्ष में 319 मत हो सकते हैं, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक लगभग 360 मतों से यह संख्या अब भी कम है।
इस बीच, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों तथा कुछ अन्य राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, सरकार को यदि पर्याप्त राजनीतिक समर्थन मिलने के संकेत मिलते हैं तो परिसीमन संबंधी संशोधित विधेयक को मानसून सत्र के दौरान ही पेश किया जा सकता है।
भाषा हक अविनाश
अविनाश
0508 2126 दिल्ली