झारखंड में परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन 13वें दिन भी जारी, विपक्ष ने विधानसभा में प्रदर्शन किया
रंजन
- 06 Aug 2026, 01:43 PM
- Updated: 01:43 PM
रांची, छह अगस्त (भाषा) झारखंड में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन बृहस्पतिवार को और तेज हो गया। आंदोलन के समर्थन में विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। पिछले 13 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब छह प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर हैं।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई को जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन हाल के वर्षों में राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है।
प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने तथा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराने की मांग कर रहे हैं।
विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने की मांग की।
विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार झारखंड के युवाओं के भविष्य का ''सौदा'' कर रही है।
उन्होंने कहा, ''सरकार ने एक समिति गठित की है, लेकिन उसे यह समझना चाहिए कि उसकी सीआईडी और समिति पर किसी को भरोसा नहीं है। मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।''
कोडरमा से भाजपा विधायक नीरा यादव ने नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर दिल्ली में हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा, ''दिल्ली में आंदोलन के दौरान कांग्रेस का रवैया कुछ और होता है, जबकि झारखंड में वही पार्टी अलग रुख अपनाती है।'' इस आंदोलन के कारण अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना समर्थन दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा राष्ट्रीय समस्या है और उन्होंने गतिरोध समाप्त करने के लिए बातचीत की पेशकश की।
भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
उन्होंने कहा, ''मैं उन छात्रों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया है। आज सार्थक बातचीत संभव है।''
छात्र संगठनों द्वारा सात और दस अगस्त को विधानसभा घेराव के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने छह से 12 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
इस बीच, प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधार की अपनी मांग पर अड़े रहे।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उनके समर्थन में दो महिलाओं सहित पांच अन्य प्रदर्शनकारी भी अनशन पर बैठ गए।
महतो के रक्त शर्करा और रक्तचाप का स्तर काफी गिर जाने से उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई।
हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर दिल्ली में 26 दिन का अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने महतो से फोन पर बात की और उनसे अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कम-से-कम पानी पीने का आग्रह किया। वांगचुक की अपील के बाद महतो ने पानी पिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार से बार-बार अपील करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का यह कठोर तरीका अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने कहा, ''दो महिलाओं समेत हमारे पांच साथी आंदोलन को मजबूत करने और हमारी मांगों पर दबाव बनाने के लिए आमरण अनशन में शामिल हुए हैं।''
अनशन कर रहीं प्रदर्शनकारी सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार ने छात्रों की चिंताओं की ''अनदेखी'' की है, जिसके कारण उनके पास आंदोलन तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी हबीबा ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा, ''मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक जैसे हैं। जब बच्चे भूखे रहते हैं तो अभिभावक को भी पीड़ा होती है। हमें उम्मीद है कि वह हमारी शिकायतें सुनेंगे। हमें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई और न्याय चाहिए।''
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को धरनास्थल का दौरा किया और 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने तथा कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
इस बीच, कथित भर्ती घोटाले की सीआईडी जांच तेज हो गई है। एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बुधवार को पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई। वहीं, जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से 28 जुलाई से अब तक चार बार पूछताछ की जा चुकी है।
भाषा गोला रंजन
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