मप्र उच्च न्यायालय ने आत्महत्या मामले में वॉट्सऐप संदेशों को महत्वपूर्ण मृत्यु-पूर्व बयान करार दिया
सुरभि
- 06 Aug 2026, 02:31 PM
- Updated: 02:31 PM
इंदौर, छह अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने आदिवासी समुदाय के 25 वर्षीय व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मृतक के मोबाइल फोन में मिले वॉट्सऐप संदेशों को 'प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण मृत्यु-पूर्व बयान' करार दिया है।
अदालत ने इस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य कानूनी पहलुओं पर गौर करते हुए तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने धार जिले के विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) द्वारा आरोपियों की जमानत याचिकाएं निरस्त करने के आदेश को 27 जुलाई को बरकरार रखा और इसके खिलाफ उनके द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज कर दी।
अभियोजन पक्ष ने उच्च न्यायालय में कहा कि संतोष उर्फ लखन औसारी (25) ने कृषि भूमि के पुराने विवाद को लेकर करण जाट, धर्मेंद्र जाट और उमेश जाट द्वारा कथित रूप से धमकाने, गाली-गलौज, अपमान और जान से मारने की धमकियों से परेशान होने पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी।
अभियोजन के मुताबिक जांच के दौरान सामने आया कि मृत्यु से पहले सात मई को औसारी ने अपने पिता के मोबाइल नंबर पर तीन वॉट्सऐप संदेश भेजे थे।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''अभियोजन द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण साक्ष्यों में मृतक के मोबाइल फोन का पंचनामा शामिल है। रिकॉर्ड से पता चलता है कि मृत्यु से कुछ समय पहले औसारी ने अपने पिता के मोबाइल नंबर पर तीन वॉट्सऐप संदेश भेजे थे।''
एकल पीठ ने कहा कि यह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य 'प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण मृत्यु-पूर्व बयान' है जिसमें आरोपियों का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया है।
अदालत ने कहा कि मृतक के पिता और भाई के वे बयान भी अभियोजन के कथन की पुष्टि करते हैं जो पुलिस की जांच के दौरान दर्ज किए गए थे।
उधर, आरोपियों के वकील ने उच्च न्यायालय में दलील पेश की कि उनके पक्षकारों का औसारी की आत्महत्या से कोई संबंध नहीं है और उन्हें पुरानी रंजिश के कारण इस मामले में फंसाया गया है।
अभियोजन ने जांच में मिली सामग्री और आरोपों की प्रकृति का हवाला देते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत में जोरदार आपत्ति जताई।
एकल पीठ ने कहा कि पूरे मामले पर गौर करने पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मृत्यु से पहले औसारी के भेजे गए वॉट्सऐप संदेशों में आरोपियों का स्पष्ट उल्लेख है और लगातार प्रताड़ना के संबंध में मृतक के करीबी परिजनों के बयान भी अभियोजन के पक्ष का समर्थन करते हैं, इसलिए आरोपियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य संबंधी तर्क और अन्य आधार मुकदमे के मौजूदा स्तर पर उन्हें जमानत दिए जाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा हर्ष सुरभि
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