राजनाथ की अध्यक्षता में हुई संसदीय समिति की बैठक; प्रादेशिक सेना पर चर्चा
वैभव
- 06 Aug 2026, 03:29 PM
- Updated: 03:29 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक संसदीय समिति की बैठक में प्रादेशिक सेना पर चर्चा हुई और समिति के सदस्यों ने इसकी समग्र प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए सुझाव दिए।
सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रशिक्षित सैनिकों का एक 'रिजर्व' तैयार करके रक्षा बलों के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मियों को तैयार रखती है, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है।
सिंह ने यहां रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रादेशिक सेना पर चर्चा हुई।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों के समक्ष प्रादेशिक सेना के कामकाज, भूमिका और मुख्य उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सदस्यों ने इसे और मजबूत बनाने और इसकी कुल प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए सुझाव भी दिए।
अपने संबोधन में, सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में प्रादेशिक सेना के योगदान को ''महत्वपूर्ण'' बताया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां रक्षा बलों की भूमिका मुख्य रूप से सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा जैसे अन्य क्षेत्रों में भी योगदान देती है।
सिंह ने कहा, ''प्रादेशिक सेना 'नागरिक-सैनिक' अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य जहां एक ओर आम नागरिकों की तरह अपने कामकाज में लगे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए वर्दी भी पहनते हैं।''
उन्होंने कहा कि जब कर्मी अपना कार्यकाल पूरा करके एक आम नागरिक के तौर पर जीवन जीते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक ''जीवंत सेतु'' की भूमिका निभाते हैं और लोगों, खासकर युवाओं को रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि प्रादेशिक सेना एक प्रशिक्षित और मजबूत बल है, जिसमें लगभग 44,400 कर्मी और 59 अलग-अलग इकाइयां शामिल हैं।
सिंह ने प्रादेशिक सेना को ''सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला'' बताया, जो प्राकृतिक आपदाओं के समय तुरंत राहत और मदद पहुंचाती है। उन्होंने केरल में बाढ़, ओडिशा में चक्रवात और हाल में असम में आई बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य करने तथा जरूरतमंदों को मेडिकल सहायता पहुंचाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
पर्यावरण प्रबंधन करने, और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में उनके योगदान की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना के पारिस्थितिकी कार्य बल ने अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगाए हैं।
प्रादेशिक सेना का गठन 9 अक्टूबर 1949 को हुआ था। दशकों की अपनी यात्रा के दौरान इसने युद्ध के समय और मानवीय व पर्यावरण संरक्षण में देश की सेवा की है।
भाषा सुभाष वैभव
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