नीट आरोपपत्र: एनटीए विशेषज्ञ की सोसाइटी के 'एक्सेस कंट्रोल ऐप', फोन रिकॉर्ड्स से खुली परतें
वैभव
- 07 Aug 2026, 03:40 PM
- Updated: 03:40 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी 2026) प्रश्नपत्र लीक मामले में डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों पर आधारित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में पुणे की उस आवासीय सोसाइटी के 'एक्सेस कंट्रोल ऐप' का रिकॉर्ड भी शामिल किया गया है, जहां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के रसायन विज्ञान विशेषज्ञ एवं आरोपी पी. वी. कुलकर्णी रहते थे।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने 28 जुलाई को यहां विशेष अदालत में 13 आरोपियों के विरुद्ध दाखिल आरोपपत्र में कुलकर्णी की सोसाइटी के 'एक्सेस कंट्रोल ऐप' से प्राप्त अभिलेखों का उल्लेख किया है। इनमें उन विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक विवरण भी शामिल हैं, जो कुलकर्णी द्वारा संचालित विशेष कोचिंग कक्षाओं में आते थे।
इस ऐप का उपयोग नियंत्रित प्रवेश वाले आवासीय परिसरों में आगंतुकों के प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता है।
जांच एजेंसी ने इन अभिलेखों के आधार पर यह पुष्टि की कि अप्रैल में यानी तीन मई को आयोजित 'नीट-यूजी 2026' परीक्षा से कुछ दिन पहले संबंधित छात्र और उनके अभिभावक कुलकर्णी की सोसाइटी में पहुंचे थे।
कुलकर्णी भी उस समय पुणे में थे, इस तथ्य की पुष्टि कुलकर्णी के मोबाइल फोन के सीडीआर और उनकी लोकेशन विश्लेषण से भी हुई।
सीबीआई के आरोपपत्र में एनटीए के पैनल में शामिल पुणे के तीन विषय विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी (रसायन विज्ञान), मनीषा गुरुनाथ मांढरे (प्राणी विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान) और मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी) को मुख्य आरोपी बताया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने आर्थिक लाभ के बदले प्रश्न लीक करने के लिए एनटीए की प्रक्रियागत खामियों का लाभ उठाया।
जांच एजेंसी के अनुसार, ब्यूटीशियन मनीषा संजय वाघमारे के माध्यम से इन विशेषज्ञों तक पहुंच बनाई गई। वाघमारे ने बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए राजस्थान और हरियाणा के अभ्यर्थियों तक प्रश्न पहुंचाए। इसी के बाद प्रश्नपत्र लीक का मामला उजागर हुआ और एनटीए में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई।
आरोपपत्र के अनुसार, अप्रैल में वाघमारे ने कुलकर्णी और मांढरे द्वारा संचालित विशेष कोचिंग कक्षाओं में विद्यार्थियों को बैठाया तथा उनकी नोटबुक एकत्र कीं। इन नोटबुक में दोनों विशेषज्ञों द्वारा लिखवाए गए प्रश्न दर्ज थे, जिनमें कुछ प्रश्नों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण और अत्यंत महत्वपूर्ण चिह्नित किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई को जांच में मनीषा हवलदार की भूमिका भी मिली। आरोप है कि उसने मांढरे के कहने पर एक अभ्यर्थी की मां को भौतिकी विषय के 16 पृष्ठों की सामग्री उपलब्ध कराई, जिसमें 68 प्रश्न शामिल थे।
एजेंसी ने अभ्यर्थियों और बिचौलियों से बरामद लीक सामग्री को दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के पास परीक्षण के लिए भेजा। जांच में पाया गया कि इस सामग्री का बड़ा हिस्सा अलग-अलग तरह से नीट-यूजी 2026 के चार प्रश्नपत्र सेट कैलाश, शिवालिक, सेट-दो और सेट-तीन से मेल खाता है।
अधिकारियों के अनुसार, जिन प्रश्नपत्र सेट तक संबंधित विशेषज्ञों की पहुंच थी, उनसे बरामद सामग्री का अधिकतम 85 प्रतिशत तक मिलान हुआ जबकि जिन सेट तक उनकी पहुंच नहीं थी, उनसे सबसे कम समानता पाई गई।
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि ओखला स्थित एनटीए मुख्यालय के एक सुरक्षित परिसर में प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद का कार्य किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान कई प्रक्रियागत कमियां थीं, जिनका लाभ उठाकर कुलकर्णी, मांढरे और हवलदार ने होटल लौटने के बाद प्रश्नपत्र की सामग्री को दोबारा तैयार किया।
आरोपपत्र के अनुसार, कुलकर्णी रफ कागज का उपयोग कर प्रश्नों के छोटे-छोटे पर्चे और उनके वैकल्पिक उत्तर छिपाकर बाहर ले जाते थे। वे अपेक्षाकृत सरल प्रश्नों को याद भी कर लेते थे और होटल लौटने के बाद उन्हें दोबारा लिखते थे।
सीबीआई के अनुसार, मार्च और अप्रैल के बीच अलग-अलग तिथियों में इसे अंजाम दिया, जिससे आरोपियों को तीन मई की परीक्षा से पहले पुणे लौटकर कोचिंग जारी रखने का पर्याप्त समय मिल गया।
एजेंसी का कहना है कि इस तरह कोचिंग को संचालित करना एनटीए के नियमों के विपरीत था।
जांच एजेंसी ने एक कोचिंग संस्थान के संचालक शिवराज रघुनाथ मुटगावकर को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि उसने एक बिचौलिए के माध्यम से कुलकर्णी से प्रश्नपत्र प्राप्त किए और धन लेकर उन्हें अपने विद्यार्थियों में वितरित किया।
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