जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तो पूरे शहर को बधंक क्यों बनाया जाए?: उच्च न्यायालय
नरेश
- 07 Aug 2026, 04:29 PM
- Updated: 04:29 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन और धरनों के लिए निर्धारित स्थल बनाए रखने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर राजधानी के बीचों-बीच होने वाले प्रदर्शनों के कारण पूरे शहर को ''बंधक'' क्यों बनाया जाए?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा, ''मेरे अनुसार, ऐसी चीजें शहर के भीतर नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह सरकार का फैसला है। बेवजह पूरे शहर को बंधक क्यों बनाया जाए?''
अदालत 'ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी' की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली पुलिस को 10 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे के बीच जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति देने के अनुरोध पर फैसला लेने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस ने नौ जुलाई से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया है जिस पर न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, ''व्यक्तिगत रूप से कहूं तो शहर के भीतर प्रदर्शन क्यों होने चाहिए?''
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था पुलिस का क्षेत्र है और दिल्ली पुलिस को शनिवार तक याचिकाकर्ता के अनुरोध पर फैसला करने का निर्देश दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि वह अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस पर कोई निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों को अपने फैसले से याचिकाकर्ता को अवगत कराना चाहिए।
अपर सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि स्वतंत्रता दिवस पास आ रहा है और संबंधित क्षेत्र में निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू है।
उन्होंने यह भी सूचित किया कि उच्चतम न्यायालय पहले से ही विरोध प्रदर्शन के लिए एक वैकल्पिक स्थान तय करने के मुद्दे पर विचार कर रहा है।
तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय एक जनहित याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हुआ था जिसमें कहा गया था कि राजधानी के केंद्र में स्थित जंतर-मंतर अब प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है क्योंकि इसे निवासियों को असुविधा होती है और आवश्यक सेवाएं बाधित होती हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि प्रदर्शन में लगभग 75 लोगों के शामिल होने का अनुमान है और दिल्ली पुलिस चाहे तो उन्हें 10 अगस्त के लिए कोई वैकल्पिक स्थान भी सुझा सकती है।
अदालत ने कहा, ''दिल्ली पुलिस आवेदन पर फैसला करेगी और कल तक अपने फैसले के बारे में सूचित करेगी।''
याचिकाकर्ता अनुसूचित जाति के ढांचे में दलित ईसाइयों को शामिल करने की अपनी पुरानी मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांग रहा है।
भाषा खारी नरेश
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