पाकिस्तान के साथ संबंध केवल आतंकवाद मुक्त माहौल में आगे बढ़ सकते हैं: सरकार ने लोस में कहा
सुभाष
- 07 Aug 2026, 06:11 PM
- Updated: 06:11 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते ''आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त माहौल'' में ही आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन यह पड़ोसी देश भारत के खिलाफ ''आतंकवाद को सरकारी नीति'' के तौर पर इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही। यादव ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की मौजूदा स्थिति और दोनों देशों के बीच संबंधों में राजनीतिक, कूटनीतिक एवं व्यापारिक स्तर पर हुए बदलावों के बारे में पूछा था।
विदेश मंत्री ने कहा, ''सरकार का यह दृढ़ रुख है कि पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते तभी आगे बढ़ सकते हैं जब माहौल आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त हो। हालांकि, पाकिस्तान, सीमा-पार से आतंकवाद की नीति अपनाए हुए है और भारत के खिलाफ आतंकवाद को सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।''
उन्होंने कहा कि 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान का 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' का दर्जा वापस ले लिया और पाकिस्तान में पैदा होने वाले या वहां से निर्यात होने वाली सभी वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया।
सरकार ने बताया कि इसके बाद पाकिस्तान ने कुछ एकतरफा कदम उठाए, जिनमें राजनयिक रिश्तों का स्तर कम करना और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार स्थगित करना शामिल था।
जयशंकर ने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने कई कूटनीतिक कदम उठाए। इनमें सिंधु जल संधि को कुछ समय के लिए स्थगित करना, अटारी जांच चौकी बंद करना, वीजा पर पाबंदी लगाना और संबंधित मिशन में कूटनीतिक तथा आधिकारिक मौजूदगी कम करना शामिल था।
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई भी की गई। फिलहाल, भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे की राजधानी में अपने-अपने राजनयिक मिशन बरकरार रखे हुए हैं।''
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कामकाज से जुड़े संपर्क जारी हैं, जिनमें डीजीएमओ-स्तर की बातचीत, बैलिस्टिक मिसाइलों के उड़ान परीक्षण की पूर्व सूचना साझा करना और अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों तथा एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद कैदियों की सूची साझा करना शामिल है।
मंत्री से यह भी पूछा गया कि पिछले पांच वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तरों पर कितनी द्विपक्षीय बातचीत हुईं और उनमें किन मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही, यह भी पूछा गया था कि क्या सरकार का अब भी यही मानना है कि सीमा पार से होने वाला आतंकवाद खत्म होने तक पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद और उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ उचित कार्रवाई करने, किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त न करने और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक कदम उठाने का अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। इन्हीं बातों के आधार पर भारत का यह मानना है कि सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का खत्म होना जरूरी है।''
भाषा वैभव सुभाष
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