दिल्ली पुलिस आयुक्त बताएं बंद पड़े परिसरों की जांच कैसे की जाए: एनजीटी
पवनेश
- 07 Aug 2026, 07:08 PM
- Updated: 07:08 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि बाहर से बंद उन परिसरों की जांच के लिए कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, जिनके बारे में आशंका है कि उनका इस्तेमाल पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से जुड़ी अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। एनजीटी ने यह निर्देश जाफराबाद थाना क्षेत्र विशेष रूप से अरविंद नगर और घोंडा गांव इलाके में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने चार अगस्त के दिये आदेश में कहा कि जाफराबाद थाना प्रभारी (एसएचओ) ने एक हलफनामा दाखिल किया है।
हलफनामे में 31 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), बीएसईएस और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त जांच का ब्योरा दिया गया है।
जाफराबाद थाना प्रभारी (एसएचओ) की रिपोर्ट में बताया गया कि परिसर के मालिक अक्सर जांच दल को प्रवेश से रोकने के लिए अपने प्रतिष्ठानों में ताला लगा देते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में महिलाएं भी शामिल होती हैं और उग्र भीड़ एकत्र होकर आक्रामक व्यवहार करती है तथा अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर जांच प्रक्रिया में बाधा डालती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि जांच दल ने संदिग्ध अवैध गतिविधियों की पुष्टि के लिए ''ताले तोड़कर'' निरीक्षण करने पर विचार किया लेकिन सक्षम प्राधिकारी से विशेष अनुमति या स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं किया जा सका।
पीठ ने आदेश में कहा, ''थाना प्रभारी ने बताया कि कुछ मामलों में सक्षम प्राधिकारी से विशेष अनुमति या स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने के कारण ताले तोड़ने के बाद भी निरीक्षण नहीं किया जा सका।''
पीठ ने यह भी कहा, ''यह भी बताया गया है कि परिसर में मौजूद लोगों के विरोध के कारण संदिग्ध अवैध गतिविधियों की प्रभावी जांच करना एक गंभीर चुनौती बन गया।''
पीठ ने हालांकि कहा कि दिल्ली पुलिस के वकील यह स्पष्ट नहीं कर सके कि ऐसे परिसरों में निरीक्षण के लिए किसकी अनुमति आवश्यक होगी, जहां बाहर से ताला लगा होने के बावजूद पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियां चलाये जाने की आशंका है।
अधिकरण ने कहा, ''इसलिए हम दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं कि ऐसे परिसरों का निरीक्षण किस प्रकार किया जा सकता है, जो बाहर से बंद हैं लेकिन जिनके अंदर अवैध गतिविधियां चलाये जाने का आरोप है।''
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
भाषा जितेंद्र पवनेश
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