अन्नाद्रमुक ने कावेरी मुद्दे को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा
दिलीप
- 07 Aug 2026, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
मदुरै (तमिलनाडु), सात अगस्त (भाषा) अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता आर. बी. उदयकुमार ने कावेरी जल विवाद को लेकर शुक्रवार को कर्नाटक सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्य अपने अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए तमिलनाडु को केवल एक माध्यम की तरह इस्तेमाल करके ''आधिपत्यवादी रवैया'' दिखा रहा है।
कर्नाटक सरकार द्वारा वैधानिक संस्थाओं की लगातार अनदेखी किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उदयकुमार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से आग्रह किया कि वह राज्य के नदी तटवर्ती अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट रुख प्रस्तुत करने के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाएं।
उदयकुमार ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, ''बांधों के भर जाने पर केवल खुद को बचाने के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ना कर्नाटक सरकार के आधिपत्यवादी रवैये को उजागर करता है, जिसने ऐतिहासिक रूप से तमिलनाडु को अपनी जल निकासी व्यवस्था से अधिक कुछ नहीं समझा है।''
अन्नाद्रमुक नेता ने आरोप लगाया कि कर्नाटक ने बार-बार उच्चतम न्यायालय, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए), कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्देशों की अनदेखी की है।
उदयकुमार ने कहा, ''कर्नाटक जुलाई के लिए तमिलनाडु के वैध हिस्से का पानी छोड़ने में विफल रहा और उसने 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश की पूरी तरह अनदेखी की। भारी बारिश के बाद, कर्नाटक ने अपने ही जलाशयों को बचाने के लिए अचानक लगभग 18,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ दिया।''
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक ने पहले ही ऐतिहासिक समझौतों का उल्लंघन करते हुए चार बांध बना लिए हैं और वर्तमान में मेकेदातु बांध के निर्माण को आगे बढ़ा रहा है, ताकि तमिलनाडु की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह को पूरी तरह रोक दिया जाए।
उन्होंने कावेरी नदी पर तमिलनाडु की अत्यधिक निर्भरता पर जोर दिया और स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि राज्य के 18 जिलों में लगभग 21 लाख एकड़ कृषि भूमि इस नदी पर निर्भर है और सूखे के खतरे का सामना कर रही है।
उदयकुमार ने कहा, ''यह नदी 320 से अधिक संयुक्त पेयजल परियोजनाओं को संचालित करती है। इक्कीस जिलों में लगभग 5.5 करोड़ लोग अपनी पेयजल आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से कावेरी पर निर्भर हैं।''
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में राजनीतिक दल कावेरी मुद्दे पर लगातार अपने वैचारिक मतभेदों को अलग रखकर एक राय पर सहमत रहते हैं। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से इसी तरह की रणनीति अपनाने का आग्रह किया।
भाषा
देवेंद्र दिलीप
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