दिल्ली कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी विधेयक को मंजूरी दी
सुरेश
- 07 Aug 2026, 10:09 PM
- Updated: 10:09 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) दिल्ली कैबिनेट ने राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित एक विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा का विस्तार करना और इस संबंध में एक कानूनी ढांचा तैयार करना है।
विधेयक को चर्चा और अनुमोदन के लिए दिल्ली विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। इस विधेयक को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक दिल्ली में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नये युग की शुरुआत करेगा और इसके माध्यम से राजधानी में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, उद्योगों के साथ शैक्षणिक सहयोग मजबूत करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक साझेदारियों को बढ़ावा देना है।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप है और दिल्ली को वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''वर्षों से देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली उन चुनिंदा बड़े क्षेत्रों में शामिल रही है, जहां निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा उपलब्ध नहीं था। इस वजह से बड़ी संख्या में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पड़ोसी राज्यों अथवा विदेशों का रुख करना पड़ता था।"
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद छात्रों को अपने ही शहर में विश्वस्तरीय और प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा और इससे छात्रों के सामने अधिक शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध होंगे, परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और विद्यार्थी अपने परिवार एवं सामाजिक परिवेश से जुड़े रहते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
बयान के मुताबिक, यह विधेयक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं तथा उनके 'ऑफ-कैंपस' केंद्रों के लिए भी दिल्ली में अपनी उपस्थिति स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इसमें कहा गया है कि इस विधेयक में विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के छात्रों के लिए लागू आरक्षण नीति के अनुसार 25 प्रतिशत सीट आरक्षित होंगी और सभी विश्वविद्यालयों में पारदर्शी एवं भेदभावरहित प्रवेश प्रक्रिया अनिवार्य होगी।
विधेयक के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों के संचालन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था भी स्थापित की जाएगी। इसके तहत दिल्ली निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जो शिक्षण व्यवस्था, अनुसंधान, संस्थागत प्रशासन, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं, छात्र अभिलेखों तथा विश्वविद्यालयों के समग्र प्रदर्शन की निगरानी करेगी।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालय स्थापित होते रहे, जबकि दिल्ली के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की तलाश में अपने ही शहर से बाहर जाना पड़ता था।
उन्होंने कहा, "आज हमने उस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह कानून केवल निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दिल्ली के युवाओं को अपने ही शहर में विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध हो। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है कि दिल्ली को भारत की "नॉलेज कैपिटल" बनाना।
भाषा नोमान नोमान सुरेश
सुरेश
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