इलाहाबाद उच्च न्यायालय राहुल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्यवाही न करे: शीर्ष अदालत
DailyWorld
- 17 Aug 2026, 03:53 PM
- Updated: 03:53 PM
नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राहत देते हुए सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कहा कि वह कांग्रेस नेता के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में कार्यवाही न करे।
शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी कहा कि वे गांधी के खिलाफ दर्ज मामले के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया और सीबीआई, ईडी तथा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर को नोटिस जारी किया।
पीठ उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ गांधी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इसने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की अगली तारीख तक अपने यहाँ होने वाली कार्यवाही को टाल दे।
सिब्बल ने शुरू में कहा, ''कानून में ऐसी किसी प्रक्रिया का कोई प्रावधान नहीं है। यह किसी को निशाना बनाकर परेशान करने वाली प्रक्रिया है, जिसे कानून मान्यता नहीं देता। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यही याचिकाकर्ता बार-बार ऐसे प्रयास कर रहा है।''
उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की विग्नेश शिशिर की पात्रता पर सवाल उठाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ''मैं बस इतना ही कह सकता हूँ कि सीबीआई ने शिकायत की पुष्टि करने के अलावा और कुछ नहीं किया है।''
केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि इस मामले में अब तक उनकी कोई भूमिका नहीं रही है, और अगर शिकायत से संज्ञेय अपराध होने का पता चलता है, तो यह बहुत गंभीर बात है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ''हमें उससे कोई लेना-देना नहीं है... मान लीजिए कोई हत्या वगैरह करता है, तो पुलिस को अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन हमें जो लगता है, वह यह है कि दोनों पक्षों से मिलने वाली मदद के आधार पर, अगर अदालत कोई निर्देश जारी करना चाहती है, तो उससे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने की उम्मीद की जाती है।''
गांधी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले शिशिर ऑनलाइन पेश हुए और उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ कांग्रेस नेता की याचिका का विरोध किया।
उन्होंने कहा, ''यह प्राथमिकी से पहले के चरण का एक साधारण मामला है... प्राथमिकी से पहले के चरण में आरोपी को अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं है।''
सिब्बल ने कहा, ''तथ्य सही भी हो सकते हैं और गलत भी। लेकिन अगर तथ्य सही हैं, तो यह अदालत के अधिकार-क्षेत्र का इस्तेमाल करने का एक गंभीर मामला है।''
जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए विधि अधिकारी से न्यायमूर्ति बागची ने पूछा, ''अगर मामला इतना गंभीर है, तो आपकी एजेंसी चुप क्यों रही? क्या आपको अदालत से निर्देश की ज़रूरत है... क्या आपने स्वत: संज्ञान से कोई कार्रवाई की है? नहीं, है ना?''
सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 20 जुलाई को एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच में हुई प्रगति का ब्योरा देते हुए व्यक्तिगत रूप से एक नया हलफनामा दाखिल करें।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि अगर जांच के दौरान ईडी को कोई ऐसी जानकारी या दस्तावेज़ मिलते हैं जिनसे किसी गैर-कानूनी काम का पता चलता है, तो वह कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
उच्च न्यायालय उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कांग्रेस नेता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने का आग्रह किया गया था।
शिशिर की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर लगभग दो घंटे तक बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया गया था।
इससे पहले, गांधी ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसमें सीबीआई और ईडी को उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
शिशिर ने पूर्व में याचिकाएँ दायर कर आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता के पास दोहरी नागरिकता है।
भाषा