जेएफसी का आईएसएल से अलग होना रणनीतिक फैसला: टाटा स्टील के उपाध्यक्ष
आनन्द
- 04 Aug 2026, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
(नाम में बदलाव के साथ)
... अभिषेक होरे ...
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट सेवा) डीबी सुंदर रामम ने मंगलवार को कहा कि जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) का आगामी इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) सत्र से हटने का फैसला काफी समय से चल रही रणनीतिक योजना का हिस्सा था और इसका आईएसएल के व्यावसायिक भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता से कोई संबंध नहीं है।
जेएफसी का यह फैसला अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) खत्म होने के बाद आईएसएल के भविष्य को लेकर उठे सवालों के कुछ महीनों बाद सामने आया। इसके साथ ही क्लब की शीर्ष स्तर की फुटबॉल में नौ साल की यात्रा का भी अंत हो गया।
सुंदर रामम ने हालांकि इसे रणनीतिक फैसला करार दिया।
उन्होंने 'पीटीआई' को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, ''मौजूदा फैसला पिछले एक साल में हुए बदलावों से जुड़ा नहीं है। हमारा निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र है। यह एक आंतरिक रणनीतिक फैसला था।''
उन्होंने कहा, ''अगर पुराना लंबी अवधि का समझौता जारी भी रहता, तब भी हमारा निर्णय यही होता। हमने महसूस किया कि हमें अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी जमीनी स्तर पर फुटबॉल विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।''
सुंदर रामम ने बताया कि टाटा स्टील ने पिछले साल से ही अपनी फुटबॉल रणनीति की समीक्षा शुरू कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने अपनी पुरानी भूमिका में लौटने का निर्णय लिया, जिसमें युवा प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें निखारना प्रमुख है।
उन्होंने कहा, ''हमने महसूस किया कि हमें अपनी विरासत यानी जमीनी स्तर पर फुटबॉल विकास की ओर लौटना चाहिए। हमारा फुटबॉल पारिस्थितिक तंत्र 1987 से मौजूद है, जबकि आईएसएल को अभी करीब एक दशक ही हुआ है।''
उनके अनुसार, ''हमें उसी क्षेत्र में काम करना चाहिए जहां हमारी असली ताकत है। इसमें समुदाय से जुड़ना, युवा प्रतिभाओं को तैयार करना और उन्हें उच्च स्तर पर खेलने के लिए सक्षम बनाना।''
उन्होंने कहा, ''हम फुटबॉल से पीछे नहीं हट रहे हैं। हम उस क्षेत्र में वापस जा रहे हैं जहां टाटा स्टील ने दशकों से भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ा योगदान दिया है।''
उन्होंने कहा कि फुटबॉल टाटा स्टील के व्यापक खेल कार्यक्रम का केवल एक हिस्सा है। कंपनी हॉकी, तीरंदाजी, क्लाइंबिंग, तैराकी और एथलेटिक्स सहित 19 खेलों को समर्थन देती है और कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुकी है।
सुंदर रामम ने कहा कि टाटा स्टील भारतीय फुटबॉल को जमीनी स्तर के कार्यक्रमों और टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) के माध्यम से समर्थन देना जारी रखेगी। वर्ष 1987 में शुरू हुई टीएफए ने कई भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार किया है, जिनमें रेनेडी सिंह, कार्लटन चैपमैन, दीपक मंडल, गौरामांगी सिंह और सैयद रहीम नबी जैसे नाम शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि 2017-18 में शुरू किए गए जमीनी स्तर के फुटबॉल कार्यक्रम के तहत अब तक करीब 6,700 बच्चों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसे और अधिक मजबूती दी जाएगी।
टीएफए की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "1987 में हमने टाटा फुटबॉल अकादमी शुरू की थी। तब से करीब 275 कैडेट को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 150 से अधिक खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है और 26 खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों में राष्ट्रीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं।"
उन्होंने कहा, ''टाटा स्टील के लिए खेल जीवनशैली का हिस्सा है। हम विभिन्न खेलों को बढ़ावा देते रहेंगे। हमारी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम है।''
भाषा आनन्द सुधीर
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0408 2024 दिल्ली