कांग्रेस ने राजस्थान में जनसमर्थक योजनाओं को ‘वापस लेने’ के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की
संतोष नरेश
- 21 Apr 2024, 06:42 PM
- Updated: 06:42 PM
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को कहा कि राजस्थान में उसकी पिछली सरकार ने राज्य के हजारों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सार्थक सुधार के लिए कई दूरदर्शी कानून पारित किए थे और पूछा कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार जनसमर्थक योजनाओं को ‘‘वापस क्यों ले रही है।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जालौर और बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली से पहले उनसे यह सवाल किया। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूछा, ‘‘भाजपा सरकार कांग्रेस की जनसमर्थक योजनाओं को वापस क्यों ले रही है? क्या प्रधानमंत्री राजस्थान के ग्रामीण समुदायों के बजाय अपने व्यवसायी मित्रों को प्राथमिकता देते हैं? ईआरसीपी को अभी तक राष्ट्रीय परियोजना क्यों नहीं नामित किया गया है।’’
रमेश ने कहा कि जब कांग्रेस राजस्थान में सत्ता में थी तो उसने कई दूरदर्शी कानून पारित किए थे जिससे राज्य में हजारों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सार्थक सुधार होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान न्यूनतम गारंटी आय अधिनियम, मनरेगा (ग्रामीण) के लिए स्वीकृत 100 दिनों के अलावा 25 अतिरिक्त दिन जोड़ना, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार योजना अधिनियम जो शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देता है, राजस्थान प्लेटफार्म आधारित ‘गिग वर्कर्स’ (पंजीकरण और कल्याण अधिनियम) तथा स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करता है, इन सभी योजनाओं ने कमजोर आबादी को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान की।’’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘इन कानूनों को लागू करने के बजाय हम दिसंबर 2023 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से शासन का पतन देख रहे हैं।’’
उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में कम से कम 15.5 लाख पेंशनभोगियों को ‘सत्यापन’ मुद्दों के कारण इस साल जनवरी से उनकी पेंशन नहीं मिली है।
रमेश ने कहा कि सरकार ने कांग्रेस की ‘चिरंजीवी योजना’ के तहत स्वास्थ्य कवरेज को 25 लाख रुपये से घटाकर भाजपा के आयुष्मान भारत के तहत सिर्फ पांच लाख रुपये करने का प्रयास किया।
उन्होंने पूछा, ‘‘अपने प्रतिशोध के कारण भाजपा सरकार कांग्रेस की जनसमर्थक योजनाओं को वापस क्यों ले रही है? क्या प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण में राजस्थान में कमजोर आबादी के लिए कोई सुरक्षा शामिल है?’’
कांग्रेस नेता ने आगे दावा किया कि भाजपा द्वारा 2023 में वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) में एक विवादास्पद संशोधन पारित करने के बाद राजस्थान के ओरण खतरे में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ओरण सामुदायिक वन हैं जो राजस्थान में सामुदायिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। परंपरागत रूप से पवित्र माने जाने वाले इन वनों को ग्रामीण समुदायों द्वारा संरक्षित और प्रबंधित किया जाता है और पशुओं को चराने से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों और त्योहारों की मेजबानी तक हर चीज के लिए इनका उपयोग किया जाता है।’’
उन्होंने कहा कि पुराने एफसीए के तहत कोई भी भूमि जो जंगल की शब्दकोश की परिभाषा को पूरा करती है, उसे अधिनियम के दायरे में शामिल किया गया था, लेकिन संशोधित एफसीए का उद्देश्य इस बहुप्रचारित परिभाषा को रद्द करना है।
रमेश ने कहा कि अब यह केवल उन वनों पर लागू होगा जिन्हें वन के रूप में घोषित या अधिसूचित किया गया हो और जो 25 अक्टूबर 1980 को या उसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ओरण को पहले अधिनियम के तहत संरक्षित किया गया था, लेकिन संशोधित कानून उन पर लागू नहीं होता है। लेकिन अब उनके विनाश का खतरा है क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड ने उन्हें बंजर भूमि के रूप में चिह्नित किया है, जिसे आसानी से विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।’’
उन्होंने यह भी पूछा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) इतने लंबे समय से क्यों लटकी हुई है? कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राजस्थान के गांव अपनी बुनियादी पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और महिलाओं को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।’’
उन्होंने कहा कि 7 जुलाई, 2018 और 6 अक्टूबर, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के लोगों से वादा किया था कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने पर केंद्र को खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा वहना करना पड़ता।
रमेश ने कहा कि वर्ष 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छह बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपना वादा पूरा करने का अनुरोध किया ताकि यह आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजना शुरू हो सके।
रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के वादों के बावजूद भाजपा ने न केवल राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने से इनकार कर दिया, बल्कि कांग्रेस के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले जल्दबाजी में इस परियोजना को राज्य के खजाने पर भारी बोझ डालने वाले खर्च की बदौलत आगे बढ़ाया है।
रमेश ने पूछा कि प्रधानमंत्री राजस्थान के लोगों से किया गया वादा पूरा करने में क्यों विफल रहे? उन्होंने प्रधानमंत्री से इन मुद्दों पर ‘चुप्पी’ तोड़ने के लिए कहा।
भाषा संतोष