महाराष्ट्र : भाषा नीति समिति पांच दिसंबर तक देगी रिपोर्ट; सदस्य राज्य भर में करेंगे दौरे
मनीषा रंजन
- 18 Sep 2025, 12:03 PM
- Updated: 12:03 PM
मुंबई, 18 सितम्बर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में भाषा नीति तय करने के लिए गठित समिति ने बुधवार को अपनी पहली बैठक की और पांच दिसंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी हितधारकों से संवाद करने का निर्णय किया।
समिति की अध्यक्षता अर्थशास्त्री एवं शिक्षाविद नरेंद्र जाधव कर रहे हैं। यह समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) के अनुरूप स्कूलों के लिए तीन-भाषा नीति तैयार करेगी। यह समिति ऐसे समय में गठित की गई है जब राज्य में कुछ राजनीतिक दलों ने हिंदी की ‘‘थोपने’’ की आशंका जताई थी। महाराष्ट्र में मराठी प्रमुख भाषा है।
समिति राजनीतिक दलों से भी बात करेगी।
बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जाधव ने कहा कि समिति ने अधिकतम लोगों तक पहुंचने और उनकी राय लेने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि 15 दिनों के भीतर समिति की वेबसाइट शुरू की जाएगी, जहां एक विशेष लिंक के माध्यम से लोग अपने सुझाव दे सकेंगे।
पूर्व योजना आयोग सदस्य रह चुके जाधव ने बताया कि समिति छात्रों, अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों, राजनीतिक नेताओं और साहित्यकारों से इस बारे में राय लेने के लिए दो प्रश्नावली तैयार कर रही है कि तीन-भाषा नीति किस कक्षा से लागू की जानी चाहिए।
पूर्ववर्ती नीति के तहत मराठी और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को पहली से पांचवीं कक्षा तक तीसरी भाषा पढ़ाई जाती थी।
जाधव ने कहा कि वह अगले दो हफ्तों में कई प्रमुख नेताओं से मिलेंगे, जिनमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी शामिल हैं, जो राज्य में हिंदी ‘‘थोपे जाने’’ का विरोध कर चुके हैं।
समिति के सदस्य पुणे, नासिक, नागपुर, रत्नागिरी, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर और मुंबई का दौरा कर हितधारकों से मिलेंगे और उनकी राय लेंगे।
जाधव ने कहा, “हम पूरी कोशिश करेंगे कि एक उचित रिपोर्ट तैयार करें, अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह उसे स्वीकार करती है या नहीं। हमारी रिपोर्ट करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगी।” उन्होंने यह भी बताया कि अन्य राज्य भी महाराष्ट्र के निर्णय पर नजर रखे हुए हैं।
समिति यह भी पता लगाएगी कि किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने यहां तीन-भाषा नीति को लागू किया है। फिलहाल केवल लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में यह नीति लागू की गई है।
भाषा मनीषा