सरकार बस्तर के गांव-गांव तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है : साय
सं संजीव राजकुमार
- 11 Dec 2025, 10:37 PM
- Updated: 10:37 PM
जगदलपुर (छत्तीसगढ़), 11 दिसंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार बस्तर के गांव-गांव तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप बस्तर अब शांति, समरसता और समृद्धि की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है तथा प्रदेश तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि साय ने आज जगदलपुर के स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक की विधिवत शुरुआत की।
इस अवसर पर बॉक्सिंग की प्रसिध्द खिलाड़ी पद्मश्री एमसी मेरीकॉम भी मौजूद थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''सरकार बस्तर के युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें विकास में सहभागी बनाने के लिए कटिबद्ध है। यही कारण है कि बस्तर के युवा लोकतंत्र में आस्था एवं विश्वास के साथ आगे आ रहे हैं और विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।''
उन्होंने कहा ,‘‘ बस्तर ओलंपिक खेल प्रतियोगिता के विजेता आने वाले समय में खिलाड़ियों के लिए रोल मॉडल बनेंगे। सरकार बस्तर के युवाओं को बेहतर अवसर एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करेगी।’’
मुख्यमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकल जीतकर आने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः तीन करोड़, दो करोड़ तथा एक करोड़ रुपए की सम्मान निधि प्रदान की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर ओलंपिक युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सकारात्मक प्रयास है।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनुजा सलाम ने बताया कि बस्तर ओलंपिक की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिले के साथ ही नुवा बाट के करीब तीन हजार पांच सौ खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के लगभग 3,500 खिलाड़ी और 'नुआ बाट' टीम के 761 प्रतिभागी इस साल बस्तर ओलंपिक में डिवीजन-स्तरीय आयोजनों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
नुआ बाट (स्थानीय हल्बी बोली का एक शब्द जिसका अर्थ है एक नया रास्ता) टीम में आत्मसमर्पित नक्सली और माओवादी हिंसा के पीड़ित प्रतिभागी के रूप में शामिल हैं।
भाषा सं संजीव