विशेषज्ञों ने प्रतिकूल विमर्शों से निपटने के लिए संस्थागत निकाय बनाने का सुझाव दिया
वैभव
- 18 Feb 2026, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) रणनीतिक मामलों के कई विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि भारत के सामरिक हितों को प्रभावी ढंग से पेश करने और देश को नुकसान पहुंचाने वाले विमर्शों का मुकाबला करने के लिए एक संस्थागत निकाय स्थापित किया जाए।
एक ''थिंक-टैंक'' द्वारा आयोजित संगोष्ठी ''भारत के वैश्विक रणनीतिक विमर्श का संचार: आवश्यकताएं और बाधाएं'' में विशेषज्ञों ने कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर" के अनुभव से कई महत्वपूर्ण सबक सामने आए हैं, विशेषकर यह कि निर्णायक सैन्य कार्रवाई के दौरान और उसके बाद संदेश को देश और विदेश में लोगों तक कैसे पहुंचाया गया।
विद्वान और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ दया थुस्सु ने कार्यक्रम में एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने टेलीविजन मीडिया में विश्वसनीयता के "गिरते स्तर" पर अफसोस जताया और ऐसे मामलों का हवाला दिया जब कुछ टीवी नेटवर्क ने संघर्ष के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा कराची और इस्लामाबाद पर कथित हमले के बारे में "गलत रिपोर्टिंग" की थी।
पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर सात मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया गया था जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष शुरू हो गया। 10 मई को दोनों देशों के बीच एक समझौते पर पहुंचने के बाद यह संघर्ष समाप्त हुआ।
दो पूर्व राजनयिकों, सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और दिल्ली स्थित एक रक्षा 'थिंक-टैंक' के प्रमुख सहित परिचर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने भी थुस्सु के विचारों का समर्थन किया और कहा कि एक "विश्वसनीय मंच" बनाया जाना चाहिए जो तथ्यों और सत्यापित जानकारी के आधार पर भारत के रणनीतिक हितों को प्रस्तुत कर सके।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल भौतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कई क्षेत्रों में लड़े जाएंगे, और ''विमर्श युद्ध'' इसका एक मुख्य पहलू है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद, इसके बारे में रणनीतिक संचार को कहीं अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता था।
यह कार्यक्रम विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) में आयोजित किया गया। वीआईएफ के निदेशक अरविंद गुप्ता ने भी कहा कि 'विमर्श युद्ध' से निपटने के लिए एक "संस्थागत" तंत्र आवश्यक है।
रणनीतिक विश्लेषक नितिन गोखले ने भी एक व्यापक संस्थागत निकाय की स्थापना के विचार का समर्थन किया, जो भारत के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और उसके प्रतिकूल विचारों का मुकाबला करने में योगदान दे सके।
भाषा आशीष वैभव
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