एसआईआर को खरगे ने बताया 'धोखाधड़ी', राज्यसभा में हंगामे के बाद विपक्ष का बहिर्गमन
प्रशांत
- 10 Mar 2026, 11:43 PM
- Updated: 11:43 PM
नई दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया "धोखाधड़ी" है और इसे विभिन्न राज्यों में चुनाव जीतने के लिए चलाया जा रहा है।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया सभी चुनावी राज्यों में चलाई जा रही है।
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें आगे बोलने की अनुमति नहीं दी। इस पर विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और इस मुद्दे पर सदन से बहिर्गमन कर दिया।
शोर-शराबे के बीच सभापति ने कहा, "आप जो मुद्दा उठा रहे हैं वह सही नहीं है। यह सही नहीं है… मैं आपको इसकी अनुमति नहीं दे रहा हूं।"
इस पर खरगे ने कहा, "एसआईआर… यह हर राज्य में जा रहा है… यह तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल तक जा रहा है…।"
बाद में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में खरगे ने राज्यसभा में दिए अपने वक्तव्य को साझा करते हुए कहा, "एसआईआर के नाम पर हर जगह चुनावी धोखाधड़ी हो रही है।"
खरगे तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन के समर्थन में बोल रहे थे, जिन्होंने एसआईआर के मुद्दे पर व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए इस पर चर्चा की मांग की थी। सभापति राधाकृष्णन ने उनकी मांग खारिज कर दी।
जब सभापति ने शून्यकाल के दौरान अन्य सांसदों को बोलने के लिए बुलाया, तो तृणमूल कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आ गए और नारेबाजी करने लगे। वहीं कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों से "वोट चोरी बंद करो" के नारे लगाते हुए विरोध जताते रहे।
सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें सदन में तख्तियां दिखाने का अधिकार नहीं है और कहा, "मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा।"
उन्होंने कहा, "आप अपने राजनीतिक लाभ के लिए आसन पर दबाव नहीं बना सकते। मैं इसका हिस्सा नहीं बन सकता।" उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी सुधार विधेयक पर हुई बहस के दौरान सभी मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है।
हंगामा जारी रहने के बीच बाद में विपक्षी सांसदों ने सदन से बहिर्गमन किया।
राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने विपक्ष के बहिर्गमन की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावी सुधार के मुद्दे पर कई घंटों तक चर्चा हो चुकी है, लेकिन जब उस पर जवाब दिया जा रहा था तब विपक्ष सदन से बाहर चला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं करता।
भाषा मनीषा प्रशांत
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