केंद्रीय मंत्री पाटिल ने जल सुधार ढांचे की शुरुआत की
पारुल
- 19 May 2026, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को राज्य जल सुधार ढांचे (एसडब्ल्यूआरएफ) की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में जल शासन सुधारों को मजबूत करना है।
पाटिल ने ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्च-स्तरीय समीक्षा बोर्ड (एचपीआरबी) की 14वीं बैठक की अध्यक्षता भी की, जिसमें नदी घाटी प्रबंधन, बाढ़ और कटाव नियंत्रण, डिजिटल की ओर बढ़ना, क्षमता निर्माण और संस्थागत सुधारों के क्षेत्रों में की गई प्रगति की समीक्षा की गई।
गुवाहाटी में राज्य जल सुधार ढांचे (एसडब्ल्यूआरएफ) की शुरुआत करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए पाटिल ने कहा कि जल सुरक्षा भारत के विकास पथ का केंद्रबिंदु है और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक प्रमुख स्तंभ है।
उन्होंने कहा कि सतत जल प्रबंधन के लिए न केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण आवश्यक है, बल्कि सुदृढ़ शासन प्रणाली, सुदृढ़ नीतियां, मजबूत संस्थाएं, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी भी जरूरी है।
जल शक्ति मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एसडब्ल्यूआरएफ एक सुधार-उन्मुख शासन ढांचा है, जिसे राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में जल क्षेत्र सुधारों को प्रोत्साहित करने और मानक स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है।
बयान में कहा गया है कि सहकारी संघवाद की भावना को समाहित करते हुए, इस ढांचे को राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किया गया है।
इसमें कहा गया है कि एसडब्ल्यूआरएफ में जल को एक साझा राष्ट्रीय संसाधन के रूप में मान्यता दी गई है, जिसके लिए केंद्र और राज्यों तथा केंद्र-शासित प्रदेशों के बीच सामूहिक स्वामित्व, सहयोगात्मक शासन और संयुक्त जवाबदेही की आवश्यकता है।
इस ढांचे में नीति एवं विनियमन, परियोजना निगरानी, डिजिटलीकरण एवं अनुसंधान, अवसंरचना एवं सामुदायिक सहभागिता - इन पांच आयामों से जुड़े 75 संकेतक शामिल हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, इस ढांचे का उद्देश्य भूजल विनियमन, बाढ़क्षेत्र क्षेत्र निर्धारण, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, बांध सुरक्षा, सहभागी सिंचाई प्रबंधन, नदी घाटी नियोजन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसे क्षेत्रों में सुधारों को प्रोत्साहित करना है।
मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है, ताकि सुधार किया जा सके और संकेतकों पर प्रतिक्रिया 31 जनवरी 2027 तक पेश करनी है।
एचपीआरबी ने असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा में बाढ़ प्रबंधन, कटाव रोधी कार्यों, जल निकासी, जलस्रोत प्रबंधन और जल संरक्षण से संबंधित जारी और प्रस्तावित परियोजनाओं की भी समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, केंद्र और पूर्वोत्तर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य हितधारक बैठक में मौजूद थे।
भाषा अमित पारुल
पारुल
1905 2021 दिल्ली