एक दशक चले मुकदमे के बाद एक हेल्थ क्लब का मालिक यौन उत्पीड़न के आरोप से बरी
दिलीप
- 03 Apr 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक हेल्थ क्लब के मालिक को एक कथित पूर्व महिला 'क्लाइंट' द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोप बहुत "सामान्य" प्रकृति के थे और उनमें सजा के लिए आवश्यक ठोस विवरणों की कमी थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निशांत गर्ग ने आशीष बंसल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354ए (यौन उत्पीड़न), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए कृत्य) के तहत अपराधों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बंसल पूजा शर्मा के साथ मिलकर एक हेल्थ क्लब चलाते थे और उसका विज्ञापन करते थे। शिकायतकर्ता ने विज्ञापन देखकर वजन घटाने के लिए उनसे संपर्क किया और 10 दिन के कोर्स में दाखिला लिया। 31 जुलाई 2015 को बंसल ने कथित तौर पर उसे क्लब में एक नई वजन घटाने वाली मशीन आजमाने के लिए आमंत्रित किया। चार अगस्त 2015 को उसने निमंत्रण स्वीकार कर लिया और उसके साथ हेल्थ क्लब गई, जहां उसने देखा कि क्लब एक नए स्थान पर स्थानांतरित हो गया है।
जब उसने मशीन के बारे में पूछा, तो बंसल ने उसे बताया कि वह मरम्मत के लिए गई है। इसके बाद उसने कथित तौर पर उसके नाक के नीचे इत्र की बोतल रख दी। शिकायतकर्ता के अनुसार, तेज गंध के कारण वह बेहोशी जैसी हालत में हो गई और होश में आने पर उसने पाया कि बंसल उसे गलत तरीके से छू रहा था।
जब उसने विरोध किया, तो बंसल ने कथित तौर पर उसे धमकी दी कि उसने उसकी अश्लील तस्वीरें ली हैं और उन्हें ऑनलाइन फैला देगा। उसने महिला की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और घटना का खुलासा करने पर उसकी जान से मारने की धमकी भी दी और दावा किया कि उसके स्थानीय पुलिस से संबंध हैं। शिकायतकर्ता ने छह अगस्त 2015 को पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता कई महत्वपूर्ण विवरणों को याद करने में असमर्थ रही, जिनमें इत्र का ब्रांड या विवरण, विज्ञापन का वह तरीका जिसके माध्यम से उसने बंसल से संपर्क किया था, 10 दिवसीय पाठ्यक्रम की विशिष्टताएं, चार महीनों में उनके साथ हुई मुलाकातों की संख्या और वे स्थान जहां वे मिले थे, शामिल हैं।
अदालत ने 30 मार्च के अपने आदेश में कहा, "इस महत्वपूर्ण गवाह की गवाही का बारीकी से अध्ययन करने पर यह पाया गया कि गवाही में कई ऐसे विवरणों का अभाव है, जो आरोपी को अपराधी मानने के लिए महत्वपूर्ण हैं।"
न्यायालय ने आदेश दिया, "पीड़िता द्वारा आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सामान्य प्रकृति को देखते हुए (जिनमें विशिष्ट विवरणों का खुलासा नहीं किया गया है) उसकी गवाही को 'उत्कृष्ट गुणवत्ता' की गवाही नहीं कहा जा सकता है और बिना पुष्टि के इसके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं होगा। इसलिए आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है और तदनुसार उसे बरी किया जाता है।"
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप
0304 2223 दिल्ली