नोएडा श्रमिक आंदोलन: श्रम कानून उल्लंघन के लिए 203 ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई
जितेंद्र
- 17 Apr 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
नोएडा/लखनऊ, 17 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद शुक्रवार को श्रम कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोप में 203 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द करने और 24 कारखानों में कंपनियों को काली सूची में डालने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
श्रम विभाग ने ठेकेदारों को श्रमिकों को 1.16 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने का निर्देश भी दिया।
अतिरिक्त श्रम आयुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि श्रमिकों को वैधानिक लाभों से वंचित करने के आरोपी ठेकेदारों को नोटिस जारी कर लंबित भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने बताया, "श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले 203 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द करने, बकाया वसूलने और कंपनियों को काली सूची में डालने की कार्रवाई की जा रही है। शेष ठेकेदारों की भी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
द्विवेदी ने बताया कि उन कुछ ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके श्रमिकों पर हालिया श्रम प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ में शामिल होने का आरोप है।
यह कार्रवाई गौतम बुद्ध नगर में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद की गई है, जिसके बाद सरकार द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय समिति ने वेतन में संशोधन की सिफारिश की थी।
गौतम बुद्ध नगर और पड़ोसी गाजियाबाद जिलों में सिफारिशों के बाद 74 अनुसूचित रोजगारों में लगे श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि लागू की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि संशोधित वेतन एक अप्रैल से प्रभावी हो गया है और नई दरों के आधार पर भुगतान सात से 10 मई के बीच किया जाएगा।
बढ़ा हुआ वेतन संविदा और स्थायी दोनों श्रमिकों पर लागू होगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के अलावा वेतन से कोई कटौती नहीं की जाएगी तथा किसी भी उल्लंघन पर श्रम कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि श्रमिकों को मानक दर से दोगुनी दर पर ओवरटाइम, बोनस और ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
भुगतान में देरी या कम भुगतान के मामलों में ठेकेदारों के खिलाफ वसूली की कार्यवाही शुरू की जाएगी और उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं तथा कंपनियों को काली सूची में डाला जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में मुख्य नियोक्ता भी जवाबदेह होगा। उन्होंने बताया कि भुगतान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।
भाषा सं जफर जितेंद्र
जितेंद्र
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