नोएडा में कामगारों की न्यूनतम वेतन वृद्धि के बाद औद्योगिक संगठनों ने राहत पैकेज की मांग की
जितेंद्र
- 17 Apr 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नोएडा, 17 अप्रैल (भाषा) नोएडा में हाल में हुए श्रमिकों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन और न्यूनतम वृद्धि को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने आर्थिक बोझ बढ़ने का हवाला देते हुए शुक्रवार को राहत पैकेज की मांग की।
'इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन' (आईआईए), 'इंडियन एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन', लघु उद्योग भारती और 'इकोटेक-12 एसोसिएशन' ने ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उद्योगों पर आर्थिक बोझ तेजी से बढ़ा है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उद्यमियों ने कहा कि सरकार और प्रशासन ने दबाव में आकर वेतन वृद्धि का निर्णय लिया, जिससे लागत में बढ़ोतरी हुई है।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष नरेश कुमार गुप्ता ने कहा, ''किसी भी निर्णय से पहले उद्योग संगठनों से संवाद नहीं किया गया। दबाव में फैसले कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।''
उन्होंने दावा किया, ''हालिया घटनाओं में करीब 100 कंपनी को नुकसान हुआ है और एक इकाई को लगभग 80 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।''
नोएडा में सोमवार को फैक्टरी कामगारों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद श्रम मुद्दों की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने न्यूनतम वेतन वृद्धि का फैसला लिया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अब अकुशल कामगारों को 13,690 रुपये प्रति माह (पहले 11,313 रुपये) मिलेंगे, जबकि अर्धकुशल कामगारों को 15,059 रुपये और कुशल कामगारों को 16,868 रुपये मिलेंगे।
बयान में बताया गया कि अन्य नगर निगम क्षेत्रों के लिए संशोधित मासिक वेतन दरें अकुशल कामगारों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल कामगारों के लिए 16,025 रुपये तय की गई हैं।
बयान के अनुसार, शेष जिलों में अकुशल कामगारों को 12,356 रुपये प्रति माह, अर्धकुशल को 13,591 रुपये और कुशल कामगारों को 15,224 रुपये मिलेंगे और यह निर्णय नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ परामर्श के बाद लिया गया है।
संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज या विशेष योजना लागू करने की मांग करते हुए कहा कि पीएफ या अन्य योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को आंशिक राहत दी जाए तथा बिजली दरों, करों तथा अन्य शुल्कों में रियायत दी जाए।
आईआईए के अध्यक्ष सरबजीत सिंह ने कहा, ''वैश्विक परिस्थितियों का असर पहले से ही उद्योगों पर पड़ रहा है। ऐसे में वेतन वृद्धि का अतिरिक्त बोझ उद्योगों के लिए और मुश्किलें खड़ी कर रहा है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो कुछ इकाइयां अपना कारोबार अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने पर विचार कर सकती हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और निवेश प्रभावित होगा।''
औद्योगिकी संगठनों ने सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में हिंसक घटनाओं को रोका जा सके।
भाषा सं खारी जितेंद्र
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