महिला आरक्षण पर भाजपा सरकार का दोहरा खेल उजागर: अशोक गहलोत
खारी
- 17 Apr 2026, 10:52 PM
- Updated: 10:52 PM
जयपुर, 17 अप्रैल (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला आरक्षण संबंधी विधेयक को लेकर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि पूर्व में पारित महिला आरक्षण कानून को रोकने के लिए लाया गया नया विधेयक एक ''सोचा-समझा षड्यंत्र'' साबित हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह भली-भांति ज्ञात था कि विपक्ष के सहयोग के बिना इतना महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सकता, इसके बावजूद विपक्षी दलों को विश्वास में लेने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
इस संदर्भ में गहलोत ने एक बयान में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे लगातार सर्वदलीय बैठक की मांग करते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री ने सभी दलों को एक मंच पर बुलाकर संवाद करने के बजाय अलग-अलग बातचीत कर राजनीतिक फूट डालने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, '''यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तीकरण के प्रति गंभीर होती, तो दक्षिण भारत के राज्यों और पश्चिम बंगाल की आशंकाओं को दूर करने के लिए वहां के मुख्यमंत्रियों से सामूहिक चर्चा की जाती, जिससे विश्वास का वातावरण बनता।''
गहलोत ने आरोप लगाया कि राजग सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक परिसीमन के नाम पर भी खतरनाक संकेत देता है। असम और जम्मू-कश्मीर में जिस प्रकार परिसीमन की प्रक्रिया के जरिए विपक्षी दलों को निशाना बनाया गया, उसके बाद केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र बुलाकर और विपक्ष के साथ संवादहीनता बनाए रखकर जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां निर्मित कीं, जिससे विधेयक पारित न हो सके और इसका दोष विपक्ष पर मढ़ा जा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक रही है और यह उसका 'दूरदर्शी विजन' है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में लाखों महिलाओं को जमीनी स्तर की राजनीति में नेतृत्व का अवसर देने का श्रेय राजीव गांधी और कांग्रेस पार्टी को जाता है, जिन्होंने पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की ऐतिहासिक पहल की थी।
भाषा पृथ्वी खारी
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