लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरने पर सियासी घमासान, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
नेत्रपाल
- 17 Apr 2026, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
मुंबई/हैदराबाद/गंगटोक, 17 अप्रैल (भाषा) संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देशभर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर महिला सशक्तीकरण का विरोध करने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए विधेयक लाने का आरोप लगाया। इस बीच महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना और सिक्किम समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर "पाखंड" का आरोप लगाते हुए कहा कि उसे महिलाओं के सशक्तीकरण का ऐतिहासिक अवसर मिला था, लेकिन उसने प्रगति के बजाय राजनीति को चुना।
फडणवीस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पूरे देश ने विपक्ष का रुख देखा, इन राजनीतिक दलों के लिए, महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों और नारों में ही मौजूद है।
फडणवीस ने कहा, ''उन्होंने प्रगति की जगह राजनीति को चुना। नारी शक्ति वंदन विधेयक के प्रति उनके विरोध ने यह उजागर कर दिया है कि वे वास्तव में किसके हितों की सेवा करते हैं।''
उन्होंने कहा कि देश भर की महिलाएं विपक्ष के रुख पर ध्यान दे रही हैं और इसे नहीं भूलेंगी।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार को संसद में हार का सामना करना पड़ा क्योंकि उसने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने और महिला सशक्तीकरण के नाम पर देश को गुमराह करने की कोशिश की।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन विधेयक के खिलाफ वोट कर खुद को ''महिला विरोधी'' साबित कर दिया है।
शर्मा ने कहा, ''17 अप्रैल को हमेशा एक काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। कांग्रेस नीत विपक्ष ने साबित कर दिया है कि वे महिला विरोधी हैं। बेहद शर्मनाक!''
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने इस दिन को भारतीय इतिहास में "लाल अक्षरों में लिखा जाने वाला दिन" करार दिया। उन्होंने विपक्षी एकता की सराहना करते हुए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व की प्रशंसा की। रेवंत रेड्डी ने इसे "काले कानूनों" को हराने वाली जीत करार दिया।
रेड्डी ने कहा, ''आज का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी और श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी के नेतृत्व में सभी लोकतांत्रिक ताकतों और विपक्षी नेताओं को एकजुट करके एक राष्ट्रीय आपदा को टाला गया।''
उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार समेत कई नेताओं को धन्यवाद दिया, जिन्होंने एकजुट होकर विधेयक का विरोध किया।
उधर, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने विधेयक के पारित न होने पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के सपनों को झटका है और एक ऐतिहासिक अवसर खो दिया गया। तमांग ने विपक्ष पर "निर्दयी राजनीति" करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाएं इसका जवाब देंगी।
भाषा रवि कांत नेत्रपाल
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