कांग्रेस ने खेड़ा को जमानत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को सराहा
पवनेश
- 01 May 2026, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को पार्टी नेता पवन खेड़ा को मानहानि मामले में अग्रिम जमानत देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कानून सबसे ऊपर है। साथ ही उसने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से लोकतंत्र के मानकों में गिरावट वाले उनके "अत्यंत अनुचित" बयानों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने शर्मा से कहा कि उन्हें यह पुनर्विचार करना चाहिए कि क्या संवैधानिक पद पर रहते हुए पवन खेड़ा के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग करना उचित था, जिसे उच्चतम न्यायालय ने भी अपने फैसले में उद्धृत किया है, और उन्होंने उनसे खेद व्यक्त करने की अपील की।
शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें किसी से भी विशेषकर सिंघवी से लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर किसी सीख की जरूरत नहीं है और जोर देकर कहा कि यह "सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं"।
उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने से संबंधित एक मामले में खेड़ा को यह कहते हुए अग्रिम जमानत दे दी कि मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उपजा प्रतीत होता है।
असम पुलिस ने शर्मा और उनकी पत्नी के पासपोर्ट की स्थिति पर सवाल उठाने के बाद खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन आरोपों के बाद राज्य में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। इसके बाद असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता के खिलाफ कुछ टिप्पणियां कीं, जिन्हें पार्टी ने "अनुचित" बताया।
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला सभी को याद दिलाता है कि जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता दांव पर होती है, तो अदालतें ही हमारी अंतिम और सबसे बड़ी आशा का आधार होती हैं।
उन्होंने असम के मुख्यमंत्री से भी आग्रह किया कि वह इस पर पुनर्विचार करें कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए खेड़ा के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग करना उचित है और उन्हें इस पर खेद व्यक्त करना चाहिए।
सिंघवी ने कहा, "हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी, मेरे सहयोगी और मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना करते हैं और त्वरित कार्रवाई के लिए इसकी प्रशंसा करते हैं।"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा सरकार में जिस संविधान पर हमला हो रहा है, आज का फैसला उस संविधान की जीत है।
रमेश ने कहा, "आज संविधान की जीत हुई है। मोदी सरकार हर दिन संविधान पर हमला करती है, लेकिन आज संवैधानिक मूल्यों और प्रावधानों की जीत हुई है। हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं।"
यह दावा करते हुए कि मोदी सरकार में संविधान पर रोज़ हमला हो रहा है रमेश ने कहा, "वे इसे जारी रखेंगे, लेकिन आज का फैसला लोगों को याद दिलाता है कि संविधान की रक्षा करने वाले अभी भी मौजूद हैं।"
सिंघवी ने कहा कि यह मामला बताता है कि जब प्रतिष्ठा को नुकसान का मुद्दा हो तो गिरफ्तारी पहला नहीं बल्कि अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में उद्देश्य स्पष्ट रूप से लगाए गए आरोपों को लेकर खेड़ा को अपमानित और परेशान करना था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री के बयान को तीन पन्नों में उद्धृत किया है, जबकि ऐसी कई बातें हैं जिनका न तो न्यायालय उल्लेख कर सकता है और न ही कोई उनके बारे में बोल सकता है।
सिंघवी ने कहा, मैं असम के मुख्यमंत्री से आग्रह करूंगा कि वह सोमवार के परिणाम की परवाह किए बिना अपने रुख पर पुनर्विचार करें, विशेष रूप से फैसले में उद्धृत टिप्पणियों के आलोक में। उच्चतम न्यायालय ने उनके कई सार्वजनिक बयान उद्धृत किए हैं जिनमें से अनेक अत्यंत अनुचित हैं और हमारे लोकतंत्र के मानकों को कमतर करते हैं।
हालांकि, शर्मा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में पलटवार करते हुए कहा, "मुझे किसी से भी, खासकर अभिषेक सिंघवी से, लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर कोई सबक नहीं चाहिए। शालीनता और उनका एक ही जगह होना संभव ही नहीं है।"
उन्होंने कहा कि यहां असली मुद्दा एक महिला से संबंधित है, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर अन्य देशों के जाली दस्तावेजों का उपयोग करके उनका चरित्र हनन किया गया है।
शर्मा ने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि अदालतें जल्द ही इसका संज्ञान लेंगी और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके एक महिला का चरित्र हनन करने के दुस्साहसी कृत्य के लिए दोषी को दंडित किया जाएगा।"
उन्होंने कहा, "और मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं। सत्यमेव जयते।"
भाषा
शुभम पवनेश
पवनेश
0105 2008 दिल्ली