भाजपा लोकसभा, विधानसभाओं में सीट बढ़ाए बिना महिला कोटा लागू करने में असहज महसूस कर रही: बीजद
सुभाष
- 01 May 2026, 11:01 PM
- Updated: 11:01 PM
भुवनेश्वर, एक मई (भाषा) ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा देश की एकमात्र राजनीतिक पार्टी है जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाए बिना विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने में असहज महसूस कर रही है।
बीजद का यह बयान ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में 'भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी' पर लंबी चर्चा के बाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आया है।
भाजपा शासित ओडिशा में विधानसभा का विशेष सत्र, लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के कुछ दिन बाद बुलाया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक नीत बीजद ने घोषणा की कि राज्य के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में 10 मई से 25 मई तक ''नारी अधिकार अभियान'' चलाया जाएगा।
विधानसभा में विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक और बीजद की अन्य महिला नेताओं ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने से क्या रोक रहा है, जिसे संसद ने 2023 में पारित किया था।
मलिक ने पूछा, ''भाजपा महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू करने में अनिच्छुक क्यों है? जबकि देश भर के सभी राजनीतिक दल लोकसभा और विधानसभाओं में मौजूदा सीटों की संख्या के साथ अधिनियम को लागू करने के पक्ष में हैं, केवल भाजपा ही इसका विरोध कर रही है।''
उन्होंने दावा किया कि यह भाजपा की पुरुषवादी और महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
मलिक ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि कैसे भाजपा ने संसद का विशेष सत्र बुलाया और परिसीमन विधेयक से जोड़कर संविधान संशोधन विधेयक पारित करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, ''हार का सामना करने के बाद, भाजपा अब विपक्षी दलों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए राज्य विधानसभाओं का विशेष सत्र बुलाने की कोशिश कर रही है।''
बीजद नेता ने दावा किया कि जनता के सामने यह बात उजागर हो चुकी है कि भाजपा पूर्व में पारित महिला आरक्षण अधिनियम (2023) के कार्यान्वयन में देरी करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, ''हम मौजूदा सीट संख्या के साथ महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू करने की मांग करते हैं।''
भाषा धीरज सुभाष
सुभाष
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