पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का निधन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत नेताओं ने जताया शोक
राजकुमार
- 19 May 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
(तस्वीरों के साथ)
देहरादून, 19 मई (भाषा) उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके परिवार ने यह जानकारी दी ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत देश—प्रदेश के अनेक नेताओं ने खंडूरी के निधन पर शोक जताया है।
दिवंगत नेता का बुधवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया जाएगा । राज्य सरकार ने खंडूरी के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक व्यक्त किया है ।
खंडूरी के परिवार में पत्नी अरूणा, बेटा मनीष और बेटी रितु खंडूरी भूषण हैं।
खंडूरी की बेटी और विधानसभा की अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने बताया कि उनके पिता वयोवृद्ध नेता ने करीब 11 बजे यहां एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय से उम्र संबंधी समस्याओं से ग्रस्त थे और पिछले दिनों में कई बार अस्पताल में भर्ती हुए ।
परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, खंडूरी का पार्थिव शरीर को बुधवार सुबह 10 बजे यहां उनके बसंत विहार स्थित आवास से बलबीर रोड स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय लाया जाएगा जहां पार्टी नेता और कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे । वहां से उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार ले जाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि 20 मई को खंडूरी की अंत्येष्टि वाले दिन राज्य सरकार ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर राज्य में 19 से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है और इस दौरान सरकारी कार्यालयों में राष्ट्र ध्वज आधे झुके रहने के साथ ही कोई शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ।
खंडूरी के निधन का समाचार मिलते ही देश-प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गयी और उनके समर्थकों तथा शुभचिंतकों का उनके आवास पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया । अनेक नेताओं ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है ।
राष्ट्रपति मुर्मू ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में खंडूरी के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने जन सेवा के क्षेत्र में ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया ।
उन्होंने कहा, ''देश के तथा उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी। मैं उनके शोकसंतप्त परिवारजनों और शुभचिंतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करती हूं।''
प्रधानमंत्री ने खंडूरी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं। मोदी ने कहा कि सशस्त्र बलों से लेकर राजनीति के क्षेत्र तक उनके बहुमूल्य योगदान को सदैव याद रखा जाएगा ।
उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड के विकास के लिए वह हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है। देश भर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए।''
उपराष्ट्रपति ने भी दिवंगत नेता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है । एक संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि खंडूरी के निधन से देश ने एक विशिष्ट सैनिक, एक सक्षम प्रशासक और असाधारण सत्यनिष्ठा वाले राजनेता को खो दिया है।
राधाकृष्णन ने कहा कि स्वर्णिम चतुर्भुज और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के माध्यम से भारत की सड़क अवसंरचना को बदलने में खंडूरी का दूरदर्शी योगदान देश के विकास पथ में एक मील का पत्थर बना रहेगा।
उपराष्ट्रपति ने हाल में अपनी उत्तराखंड यात्रा के दौरान खंडूरी से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा में पूर्व सहकर्मियों के रूप में अपने संबंधों को सुखद ढंग से याद किया।
मुख्यमंत्री अपने छत्तीसगढ़ दौरे से लौटने के बाद खंडूरी के निवास पर गए और श्रद्धांजलि अर्पित की । मुख्यमंत्री ने उनके निधन को उत्तराखंड की ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति बताया ।
धामी ने कहा कि उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्धितीय उदाहरण प्रस्तुत किया । उन्होंने कहा, ''सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई । उन्होंने प्रदेश हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विकास को नई दिशा प्रदान की ।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी । उन्होंने कहा, ''उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।''
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने खंडूरी के आवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उन्हें एक 'अजातशत्रु व्यक्तित्व' बताया ।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और भाजपा की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष महेन्द्र भटट ने भी खंडूरी के निधन पर शोक जताते हुए अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना से मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए खंडूरी 'जनरल साहब' के नाम से मशहूर थे और उनकी छवि एक अनुशासनप्रिय कड़क प्रशासक की थी ।
खंडूरी दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे । वर्ष 2007 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद खंडूरी मुख्यमंत्री बने । हालांकि, 2009 में लोकसभा चुनाव में प्रदेश की पांचों सीट पर पार्टी को मिली पराजय का जिम्मा लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया । बाद में, 2011 में उन्हें फिर से भाजपा ने राज्य की कमान सौंपी ।
खंडूरी केंद्रीय मंत्री भी रहे । दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री का पद संभाला । देश के प्रमुख शहरों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का श्रेय उन्हें दिया जाता हे ।
भाषा दीप्ति राजकुमार
राजकुमार
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