लू से मस्तिष्क और आंखों के स्वास्थ्य पर बुरा असर, चिकित्सकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
पवनेश
- 23 May 2026, 07:50 PM
- Updated: 07:50 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) देश के कई हिस्सों में लू के प्रकोप के बीच चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक गर्मी में रहने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि आंखों व तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और ये विशेष रूप से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए खतरे की घंटी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान, शरीर में पानी की कमी और लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ सकता है और संवेदनशील व्यक्तियों में थकान, चक्कर आना, तेज सिरदर्द, माइग्रेन, थकावट और यहां तक कि तंत्रिका संबंधी जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
चिकित्सकों ने बताया कि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अस्पतालों में गर्मी से संबंधित बीमारियों की शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिनमें आंखों में जलन, पानी की कमी से होने वाला सिरदर्द और गर्मी से उत्पन्न तंत्रिका संबंधी लक्षण शामिल हैं।
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में न्यूरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विनीत सूरी ने बताया, "लू का असर अब सामान्य गर्मी से संबंधित बीमारियों से परे भी दिखने लगा है। हमारी ओपीडी में तंत्रिका संबंधी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।"
उन्होंने बताया, "पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अधिक लोग गंभीर सिरदर्द, चक्कर आना, भ्रम, बेहोशी, पहले से मौजूद तंत्रिका संबंधी समस्याओं का बिगड़ना और विशेष रूप से माइग्रेन जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर आ रहे हैं।"
डॉ. सूरी ने बताया कि तेज धूप और लंबे समय तक धूप में रहने से कुछ लोगों में माइग्रेन के लक्षण बढ़ सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी और शरीर में पानी की कमी से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है और तंत्रिका तंत्र पर काफी दबाव पड़ सकता है, खासकर संवेदनशील व्यक्तियों में।
उन्होंने कहा कि लगातार भ्रम की स्थिति, बोलने में परेशानी, दौरे पड़ना या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये किसी गंभीर तंत्रिका संबंधी आपात स्थिति का संकेत हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉ. आर. पी. नेत्र विज्ञान केंद्र में प्रोफेसर नम्रता शर्मा ने कहा कि एयर-कंडीशनर का लगातार उपयोग और घर के भीतर 'स्क्रीन' पर अधिक समय बिताना भी गर्मियों में आंखों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा, ''एयर-कंडीशनर से निकलने वाली शुष्क हवा और लंबे समय तक मोबाइल तथा लैपटॉप के इस्तेमाल से आंखों में प्राकृतिक आंसुओं का निर्माण कम हो जाता है, जिससे आंखों का सूखापन बढ़ जाता है। लोग अक्सर लालिमा, धुंधला दिखना और जलन जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो इलाज नहीं होने पर धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकते हैं।''
उन्होंने कहा, ''हम एलर्जी, ड्राई आई और संक्रमण के अधिक मामले देख रहे हैं, जो आंसुओं की परत तेजी से सूखने के कारण हो रहे हैं।''
उन्होंने लोगों को बाहर निकलते समय यूवी रोधी चश्मा पहनने, धूल के संपर्क में आने के बाद साफ पानी से आंखें धोने, गंदे हाथों से आंखें न मलने, 'लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स' का इस्तेमाल करने और पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी।
नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अरुण शर्मा ने कहा कि भीषण गर्मी और लू की स्थिति न्यूरोलॉजिकल बीमारियों जैसे मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसन रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और डिमेंशिया को भी गंभीर बना सकती है। अत्यधिक गर्मी के दौरान निर्जलीकरण और खून के गाढ़ा होने से 'इस्केमिक स्ट्रोक' और 'सेरेब्रल वेनस थ्रॉम्बोसिस' का खतरा भी बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और लू, विशेषकर दोपहर के समय की चिलचिलाती गर्मी के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए और यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो छाते, धूप के चश्मे का इस्तेमाल व सिर ढंककर खुद को सुरक्षित रखकर जाना चाहिए।
'वियान आई एंड रेटिना सेंटर' के निदेशक डॉ. नीरज संदुजा ने बताया कि अत्यधिक धूप, गर्म हवाओं, धूल और शरीर में पानी की कमी के कारण आंखों में तनाव आम बात है।
उन्होंने बताया, "गर्मी का मौसम आंखों के स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। तेज धूप, गर्म हवाओं, धूल और शरीर में पानी की लंबे समय तक कमी से आंखों में सूखापन, जलन और लालिमा हो सकती है।"
डॉ. संदुजा ने बताया, "इस मौसम में कई लोगों को आंखों में जलन, खुजली या पानी आने की समस्या भी होती है। हमारे पास 'ड्राई आई सिंड्रोम', 'एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस' और 'कॉर्नियल सनबर्न' के मामले भी आते हैं। बच्चों और जो लोग लंबे समय तक बाहर रहते हैं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।"
भाषा
जितेंद्र पवनेश
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