केंद्र के आदेश से स्तब्ध दिल्ली जिमखाना के सदस्य कानूनी कार्रवाई पर कर रहे विचार
पवनेश
- 23 May 2026, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा लुटियंस दिल्ली स्थित जिमखाना क्लब को पांच जून तक अपना परिसर खाली करने का निर्देश दिए जाने से उसके कई सदस्य नाराज हैं। कुछ सदस्य इस आदेश को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे उस संस्था के लिए अप्रत्याशित बता रहे हैं, जिससे उनका दशकों पुराना जुड़ाव रहा है।
प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के निकट 2, सफदरजंग रोड स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि क्लब इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगा। उनका कहना है कि परिसर से किसी प्रकार का सुरक्षा खतरा नहीं है।
उन्होंने कहा, ''अगला कदम इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करना होगा। यह बहुत पुराना क्लब है और इसके अनेक सदस्य हैं। यहां कोई सुरक्षा खतरा या ऐसी कोई चिंता नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''एक सदस्य के रूप में मुझे लगता है कि आदेश में की गई टिप्पणियों पर पुनर्विचार होना चाहिए। ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए थी।''
परिसर खाली करने की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर सिद्धार्थ ने कहा कि यदि अदालत कोई आदेश देती है तो क्लब उसका पालन करेगा।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित यह परिसर रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य अहम उद्देश्यों के लिए बेहद जरूरी है।
आदेश के अनुसार, पांच जून को एल एंड डीओ इस परिसर का कब्जा ले लेगा।
आदेश में कहा गया, ''आपको निर्देश दिया जाता है कि उक्त तिथि पर इस कार्यालय के प्रतिनिधियों को परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सौंप दें। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में कानून के अनुसार कब्जा लिया जाएगा।"
पिछले 60 वर्षों से क्लब के सदस्य रहे मेजर अतुल देव (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वे इस आदेश को अदालत में चुनौती देंगे।
उन्होंने कहा, ''सुबह से मुझे कम से कम 50 फोन आ चुके हैं, क्योंकि यह खबर हम सभी के लिए बड़े आश्चर्य की तरह आई है। हम कानूनी रूप से इस आदेश को चुनौती देने जा रहे हैं। इस पर काम चल रहा है।''
उन्होंने बताया कि क्लब के वर्तमान में करीब 11,000 सदस्य हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
एक अन्य सदस्य ब्रिगेडियर हरिंदर पाल सिंह बेदी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह आदेश कई सदस्यों के लिए झटके जैसा है।
बेदी ने कहा, ''मैं 2006 में सेना में सेवा के दौरान 12 साल की प्रतीक्षा के बाद दिल्ली जिमखाना का सदस्य बना था। मैंने उस समय करीब 60,000 रुपये सदस्यता शुल्क दिया था, जो अब लाखों रुपये तक पहुंच चुका है। यह आदेश हमें कम से कम आश्चर्यचकित जरूर करता है।''
उन्होंने यह भी कहा कि इस आदेश से कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है, क्योंकि उनके पास आगे की तैयारी के लिए दो सप्ताह से भी कम समय है।
उन्होंने कहा, ''मैं 26 मई को क्लब जाऊंगा… कौन जानता है, शायद फिर मौका न मिले।''
तीन जुलाई 1913 को 'इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में स्थापित इस संस्था की शुरुआत औपनिवेशिक प्रशासकों और सैन्य अधिकारियों के लिए की गई थी। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद इसके नाम से 'इम्पीरियल' शब्द हटा दिया गया, जबकि मौजूदा भवनों का निर्माण 1930 के दशक में हुआ था।
भाषा गोला पवनेश
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