दिल्ली सरकार ने गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस समारोह पर 27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए: आरटीआई
सुरेश
- 25 May 2026, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने पिछले साल नवंबर में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस समारोह के उपलक्ष्य में तीन दिनों के भीतर 27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। पीटीआई (भाषा) द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगी गयी जानकारी के जवाब में यह बात सामने आई है।
दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) द्वारा दिए गए आरटीआई जवाब के अनुसार, सबसे अधिक खर्च संग्रहालय की स्थापना और टेंट सिटी की व्यवस्था पर किया गया, जबकि प्रचार गतिविधियों पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए।
आरटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, तीन-दिवसीय कार्यक्रम के लिए कुल 27.03 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें से 4.80 करोड़ रुपये संग्रहालय घटकों पर और 4.75 करोड़ रुपये समारोह के दौरान बनाई गई टेंट सिटी पर व्यय किए गए।
व्यय के विवरण से यह भी पता चला है कि भव्य कीर्तन दरबार के आयोजन पर 3.14 करोड़ रुपये और लाल किले की बाहरी दीवार पर आयोजित 'लाइट एंड साउंड' शो पर 1.78 करोड़ रुपये खर्च हुए।
दिल्ली सरकार ने नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में 25 नवंबर, 2025 से लाल किले पर तीन-दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था।
आरटीआई आवेदन पर प्राप्त जवाब के अनुसार, समाचार पत्रों के विज्ञापनों को छोड़कर जन प्रचार गतिविधियों पर 1.03 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इस समारोह के तहत दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में रोशनी, चुनिंदा स्थानों पर सजावटी तोरण द्वारों की स्थापना, परिवहन व्यवस्था और कार्यक्रम से संबंधित आधिकारिक डिजिटल मंच का विकास किया गया था।
दस्तावेजों के अनुसार, ऐतिहासिक गुरुद्वारों को रोशन करने पर लगभग 94.8 लाख रुपये और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए तोरण द्वारों पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुए।
स्मारिका के तौर पर प्रकाशित कॉफी टेबल बुक पर 84.8 लाख रुपये, जबकि परिवहन व्यवस्था पर 73.83 लाख रुपये का व्यय हुआ।
दस्तावेज में यह भी रेखांकित किया गया है कि समारोह से जुड़ी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप्लिकेशन और डिजिटल सूचना सेवाओं पर 29.18 लाख रुपये खर्च किए गए।
आरटीआई आवेदन में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में बताया गया कि इस उत्सव का आयोजन दिल्ली सरकार की ओर से किया गया था और इसका कार्य डीटीटीडीसी की पैनलबद्ध इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी 'मेसर्स प्रोजेक्शन सिस्टम्स' को सौंपा गया था।
भाषा सुमित सुरेश
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