मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा, स्वपन को वित्त, आरएसएस पृष्ठभूमि वालों को शिक्षा
नरेश
- 10 Jun 2026, 05:54 PM
- Updated: 05:54 PM
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 10 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के दस दिन बाद बुधवार को नये मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया गया तथा पत्रकार से नेता बने स्वपन दासगुप्ता को वित्त विभाग एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेताओं को शिक्षा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गयी।
राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी की गयी अधिसूचना के अनुसार तापस राय को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग मिला। वह 2024 में तृणमूल से भाजपा में आ गये थे।
राज्यसभा के सदस्य रहे दासगुप्ता को वित्त विभाग की जिम्मेदारी मिली है। भाजपा सरकार ने शिक्षा विभाग को दो खंडों में बांट दिया है तथा इन खंडों को ऐसे नेताओं के हाथों में सौंपा है जिनका आरएसएस के साथ लंबा जुड़ाव है।
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है। वह बीरभूम जिले में सूरी विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुए थे तथा प्रदेश भाजपा के महासचिव रह चुके हैं।
उत्तरी बंगाल के नेता दीपक बर्मन को स्कूली शिक्षा विभाग दिया गया है।
भाजपा के प्रदेश एवं केंद्रीय नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद विभागों का जो बंटवारा तय हुआ है, उससे यह साफ़ पता चलता है कि पार्टी उस राज्य में शासन, संगठन और विचारधारा के बीच कैसे संतुलन बनाना चाहती है, जहां उसने सत्ता तृणमूल से छीनी है।
पेश से डॉक्टर शरदवत मुखर्जी को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता दूध कुमार मंडल को कृषि विभाग का प्रभार दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कानून एवं न्यायिक मामले, भूमि एवं भू-सुधार, बिजली, सूचना एवं सांस्कृतिक मामले, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार एवं पहाड़ी मामले जैसे विभागों के साथ-साथ महत्वपूर्ण गृह विभाग भी अपने पास रखा है।
पिछली तृणमूल सरकार के समय हुए स्कूल भर्ती घोटाले के माहौल में शिक्षा विभाग को बांटने का कदम अहम माना जा रहा है। भाजपा का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि बंगाल के शिक्षण संस्थानों और पाठ्यक्रम में प्रशासनिक सुधार और वैचारिक बदलाव की ज़रूरत है।
वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने हाल के महीनों में बार-बार कहा है कि राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में ''ऐतिहासिक वृत्तांतों को सुधारने'' और भारत की सभ्यतागत विरासत एवं राष्ट्रवादी परंपराओं पर ज़्यादा ज़ोर देने की ज़रूरत है।
यह केंद्र सरकार और भाजपा-शासित ज़्यादातर राज्यों में अपनाए जाने वाले उस मॉडल से भी अलग है, जहां स्कूली और उच्च शिक्षा आम तौर पर एक ही मंत्री के पास होती है।
विभागों के बंटवारे से भाजपा के भीतर अलग-अलग क्षेत्रीय और संगठनात्मक सत्ता केंद्रों को समयोजित करने की कोशिश भी दिखती है।
शुभेंदु अधिकारी के करीबी माने जाने वाले सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष को पर्यटन और संसदीय मामलों की ज़िम्मेदारी दी गई है जबकि नोआपाड़ा के विधायक अर्जुन सिंह को श्रम और परिवहन विभाग मिले हैं।
खरदाहा के नेता कल्याण चक्रवर्ती को सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रोनिक्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण एवं बागवानी विभाग मिले हैं। उन्होंने अकादमिक जगत से राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा है।
उत्तर बंगाल के भाजपा नेता मनोज कुमार उरांव को वन मंत्री बनाया गया है, जबकि मुर्शिदाबाद के विधायक गौरी शंकर घोष को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
अरूप कुमार दास को सिंचाई और जलमार्ग विभाग मिला जबकि अजय पोद्दार को जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग सौंपा गया।
स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों में इंद्रनील खान को खेल एवं उपभोक्ता मामले का मंत्री बनाया गया है जबकि मालती रावा राय को महिला एवं बाल विकास, स्वयं सहायता समूह एवं परियोजना निगरानी विभाग मिले हैं।
झारग्राम के प्रमुख कुड़मी नेता राजेश महता को पशु संसाधन विकास और मत्स्य पालन विभाग का स्वतंत्र प्रभार वाला राज्य मंत्री बनाया गया।
विभागों के इस बंटवारे के साथ ही शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली 41 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में विभागों का आवंटन पूरा हो गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नौ मई को पांच कैबिनेट मंत्रियों - दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुडू - के साथ शपथ ली थी। इन मंत्रियों को पहले ही विभाग दे दिये गये हैं।
पॉल को शहरी विकास और नगरपालिका मामलों का विभाग मिला, दिलीप घोष को पंचायत और ग्रामीण विकास के साथ-साथ कृषि विपणन का जिम्मा सौंपा गया। अशोक कीर्तनिया को खाद्य और सहकारिता मंत्री बनाया गया, जबकि क्षुदीराम टुडू को आदिवासी विकास, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा का विभाग मिला।
निसिथ प्रमाणिक उत्तर बंगाल विकास और जल संसाधन जांच एवं विकास विभाग के प्रभारी हैं।
राज्य मंत्रिमंडल का एक जून को महत्वपूर्ण विस्तार हुआ था। राज्यपाल आर एन रवि ने 35 और मंत्रियों को शपथ दिलायी। उनमें से 13 कैबिनेट मंत्री और 22 राज्य मंत्री हैं। तीन स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री भी हैं। इस विस्तार के साथ, मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई।
कैबिनेट गठन का पहला चरण जहां भाजपा के प्रमुख चेहरों को इनाम देने के बारे में था, वहीं बुधवार को विभागों के बंटवारे से उस शासन के ढांचे का पता चला जिसे पार्टी बंगाल में बनाना चाहती है।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश
1006 1754 कोलकाता