सीसीआई ने ओडिशा के चार ट्रक संघों को प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों का दोषी पाया
अजय
- 10 Jun 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने ओडिशा में ट्रक मालिकों के चार संघों को माल ढुलाई की दरें तय करने और किसी स्वतंत्र ट्रांसपोर्टर को खनन क्षेत्र में काम करने से रोकने जैसी प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों का दोषी पाया है।
इसके बाद, प्रतिस्पर्धा नियामक ने ट्रक मालिकों के संघों (ओपी) को ऐसी किसी भी गतिविधि या काम को रोकने का निर्देश दिया जो कानून की धारा तीन के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
धारा तीन प्रतिस्पर्धा-रोधी समझौतों से संबंधित है।
नियामक ने मंगलवार को जारी एक आदेश में कहा, ''ओपी और उनसे जुड़े लोगों को कानून की धारा 3 (3) (ए) और 3 (3) (बी) का उल्लंघन करते पाया गया है। उन्होंने खनिज ले जाने वाले मालवाहक वाहनों के लिए ढुलाई की दरें तय करने और बदलने, और खदानों से कच्चे माल की ढुलाई के लिए किसी भी स्वतंत्र ट्रांसपोर्टर को अनुमति न देने जैसी गतिविधियों में शामिल होकर ऐसा किया है।''
आदेश के अनुसार, स्वतंत्र ट्रांसपोर्टर को खनन क्षेत्र में काम करने से पहले स्थानीय संघों के साथ पंजीकरण कराना या प्रवेश शुल्क देना पड़ता था।
सीसीआई ने पाया कि ये शर्तें केवल प्रक्रियात्मक नहीं थीं, बल्कि इनका असर बाजार तक पहुंच को सीमित करने वाला था।
सीसीआई ने यह भी कहा कि पंजीकरण को अनिवार्य बनाने की लगातार आदत और स्वतंत्र ट्रांसपोर्टर को काम करने की आजादी न देना, ट्रक मालिकों के संघों द्वारा ट्रांसपोर्ट सेवाओं की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गई एक मिली-जुली कोशिश को दर्शाता है।
सीसीआई ने आदेश में कहा, ''ऐसी ज़रूरतों का अनिवार्य होना और किसी पारदर्शी या बिना भेदभाव वाले प्रणाली का न होना यह बताता है कि ये गतिविधियां केवल सुविधा देने से कहीं आगे थीं और बाजार में प्रवेश के लिए रुकावट का काम कर रही थीं।''
इस प्रकार, ऐसा व्यवहार अधिनियम की धारा 3(1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3(3)(बी) के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया है।
हालांकि, सीसीआई को इस आरोप का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला कि संघों ने कृत्रिम कमी पैदा करने और ढुलाई की दरें बढ़ाने के लिए केवल छोटे ट्रकों को ढुलाई की अनुमति देने की मिली-जुली कोशिश की थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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