झारखंड रास चुनाव: कांग्रेस के विरोध के बीच भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन मंजूर
रंजन
- 10 Jun 2026, 11:21 PM
- Updated: 11:21 PM
रांची, 10 जून (भाषा) झारखंड में राज्यसभा (रास) चुनाव को लेकर मचे भारी सियासी घमासान के बीच निर्वाचन अधिकारी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध घोषित कर दिया।
निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस द्वारा जताई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया। इससे पहले, कांग्रेस ने नाथवानी की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग को लेकर विधानसभा परिसर में धरना-प्रदर्शन भी किया था।
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन के घटक दल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश से मौजूदा राज्यसभा सदस्य और उद्योगपति नाथवानी ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में झूठी और अधूरी जानकारी दी थी तथा जांच के दौरान अवैध रूप से एक नया हलफनामा जमा किया था।
नाथवानी ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को तीसरे उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था, जहां दो सीटों के लिए मतदान होना है।
नाथवानी ने ऐसे समय में पर्चा भरा है, जब विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास उन्हें जिताने के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं है, ऐसे में उनकी जीत केवल क्रॉस-वोटिंग की सूरत में ही हो सकती है।
जहां झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के नामांकन पत्रों को मंगलवार को ही मंजूरी मिल गई थी, वहीं कांग्रेस की आपत्तियों के बाद शुरुआत में नाथवानी के नामांकन पर फैसला स्थगित रखा गया था।
निर्वाचन अधिकारी रंजीत कुमार ने अपने आदेश में कहा कि नाथवानी का नामांकन 'वैध' है और सभी आपत्तियों की जांच कर उन्हें खारिज कर दिया गया है।
कुमार ने अपने आदेश में कहा, "नाथवानी परिमल का नामांकन पत्र वैध पाया गया है और इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत स्वीकार किया जाता है।"
निर्वाचन अधिकारी ने व्यवस्था दी कि उम्मीदवार ने सरकारी आवास से संबंधित आवश्यक 'अदेयता प्रमाणपत्र' (नो-ड्यूज सर्टिफिकेट) जमा कर दिया था और हलफनामे में किए गए खुलासों से जुड़े मुद्दे जांच के चरण में नामांकन खारिज करने का आधार नहीं हो सकते।
अधिकारी ने उम्मीदवार के नाम में "परिमल नाथवानी" और "नाथवानी परिमल" के रूप में आ रहे अंतर पर उठाई गई आपत्तियों को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह एक तकनीकी मुद्दा है, जिससे उनकी पहचान को लेकर कोई संदेह पैदा नहीं होता है।
फॉर्म के कुछ कॉलम खाली छोड़े जाने के आरोपों पर उन्होंने संज्ञान लिया कि नाथवानी ने स्पष्ट कर दिया था कि वे प्रविष्टियां उन पर लागू नहीं होती थीं और उन्होंने एक संशोधित हलफनामा भी जमा कर दिया था।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा, ''हम भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कथित गंभीर विसंगतियों और अधूरी जानकारी के मामले में निष्पक्ष जांच तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमने उनके नामांकन पत्र में कई तरह की विसंगतियां पाई हैं। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग उन्हें इन विसंगतियों पर स्पष्टीकरण देने के लिए अतिरिक्त समय दे रहा है।''
कमलेश ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक ने नाथवानी के नामांकन पत्र में कई विसंगतियां उजागर की हैं और उनका नामांकन रद्द करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने बताया कि हालांकि, इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
इस बीच, पूर्व केंद्रीय मंत्री और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाई गई विसंगतियों के संबंध में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष तथ्य पेश करने आए थे।
खुर्शीद ने कहा, "हालांकि, मुझे (प्रक्रिया में) शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले पर सुनवाई पूरी कर चुके हैं और इसे बंद कर दिया गया है। बहरहाल, मेरे सहयोगी सुरेंद्र चौहान ने मजबूती से हमारा पक्ष रखा।"
सुरेंद्र चौहान ने दावा किया कि नाथवानी ने अपने नामांकन पत्र के साथ जो हलफनामा संलग्न किया था, उसमें कई विसंगतियां पाई गईं।
उन्होंने कहा, "हमने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद उन्होंने उनके नामांकन पर फैसला फिलहाल के लिए लंबित रख दिया और नाथवानी को एक पत्र सौंपकर कांग्रेस उम्मीदवार द्वारा उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने को कहा।"
चौहान ने पत्रकारों से कहा, "इसके बाद भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने एक नया हलफनामा दाखिल किया, जो कि गैरकानूनी है क्योंकि अधिकारी जांच के दौरान कोई भी नया दस्तावेज स्वीकार नहीं कर सकते। नए हलफनामे का प्रारूप भी पूरी तरह से अलग है, जो अवैध है। हम उनकी उम्मीदवारी रद्द होने की उम्मीद कर रहे हैं।"
कांग्रेस की झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, ''मध्यप्रदेश में हमारे एक नेता का नामांकन बिना किसी स्पष्टीकरण के महज 15 मिनट के भीतर रद्द कर दिया गया। लेकिन यहां, नाथवानी के नामांकन पत्र में चार कमियां उजागर करने के बावजूद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कोई फैसला न लेते हुए इसे लटका रखा है।''
कांग्रेस नेता और राज्य सरकार में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक करीबी सहयोगी को चोर दरवाजे से राज्यसभा भेजने के लिए हर संभव हेरफेर का सहारा लिया जा रहा है।
कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए झारखंड भाजपा प्रमुख आदित्य साहू ने कहा, ''वे निर्वाचन आयोग के उन अधिकारियों के काम में बाधा डाल रहे हैं जो इस मामले को देख रहे हैं। झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देना चाहिए।''
नाथवानी के एक करीबी सहयोगी ने दावा किया कि उनके नामांकन पत्र को लेकर उठाई गई आपत्तियों का समाधान कर दिया गया है।
नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून है, जबकि मतदान 18 जून को होगा।
प्रदेश में दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के वास्ते किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता मत हासिल करने होंगे।
झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ 'इंडिया' गठबंधन के 56 सदस्य हैं, जिनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के दो विधायक शामिल हैं।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास 24 विधायक हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 21 तथा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), आजसू पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के एक-एक विधायक शामिल हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक है।
भाषा
सुमित रंजन
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