एनसीपीआई: 75 रुपये के कोष से राजग के सबसे प्रमुख संभावित साझेदार तक का सियासी सफर
सुरेश
- 15 Jun 2026, 07:44 PM
- Updated: 07:44 PM
नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) तृणमूल के 20 बागी सांसदों के शामिल होने से रातोंरात राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आई नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के पास वित्तवर्ष 2022-23 में महज 75 रुपये बचे थे।
यह जानकारी पार्टी की उस सालाना लेखापरीक्षण रिपोर्ट में आई थी, जिसे उसने 2022-23 के लिए निर्वाचन आयोग को सौंपा था।
तृणमूल में रविवार को उस वक्त संकट और गहरा गया, जब बागी सांसदों ने अल्पचर्चित पार्टी एनसीपीआई में विलय की घोषणा की और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में बैठने के लिए अलग व्यवस्था की मांग की।
एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकरण कराया था और निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक पार्टी ने पते के तौर पर पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल में मौजूद एक इमारत की जानकारी दी थी।
एनसीपीआई ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान उसे ''समर्थकों से चंदे'' के तौर पर 1,13,075 रुपये मिले। उसका खर्च भी लगभग इतना ही, यानी 1.13 लाख रुपये था, जिसमें 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों पर खर्च किए गए 49,400 रुपये भी शामिल थे।
पार्टी कोष में दान देने वाले नौ लोगों में पार्टी के अध्यक्ष शेवली कुंडू और उपाध्यक्ष उत्तिया कुंडू शामिल थीं, जो पति-पत्नी हैं। उन्होंने क्रमशः 15,000 रुपये और 18,000 रुपये का योगदान दिया।
निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों में एनसीपीआई को वित्त वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में मिले चंदे की कोई जानकारी नहीं है।
पार्टी ने त्रिपुरा चुनावों में चार उम्मीदवार मैदान में उतारे और अपने चुनावी नारे ''राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें'' के जरिये मतदाताओं से अपील की। इन चार में से दो उम्मीदवारों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर किस्मत आजमाई और तीसरे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, जबकि चौथे उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया गया
पार्टी के एक उम्मीदवार, बरजेडा त्रिपुरा को 536 वोट मिले, जो नोटा (उपलब्ध उम्मीदवारों में से कोई नहीं) से 36 ज़्यादा थे, जबकि दूसरे उम्मीदवार को 286 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले को 376 वोट मिले।
बरजेडा ने रविवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं और उन्हें पार्टी से जुड़ी हालिया राजनीतिक गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अगर तृणमूल के बागी सांसदों के गुट को एनसीपीआई से विलय की मंजूरी दे देते हैं तो संसद के निचले सदन में वह छठी सबसे बड़ी पार्टी और सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। यह लोकसभा सांसदों के मामले में राजग में शामिल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से काफी आगे होगी।
हालांकि, एनसीपीआई के पास इससे पहले स्थानीय निकायों में एक पार्षद तक नहीं था।
एनसीपीआई नेतृत्व का परिचय भी अनोखा है। पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष शेवली कुंडू खुद को कलकत्ता उच्च न्यायालय की वकील बताती हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता में ''गणित में स्नातकोत्तर, एमबीए और एलएलएम'' के साथ-साथ फाइनेंशियल मार्केट से लेकर ज़मीन की पैमाइश (लैंड सर्वेइंग) तक कई प्रमाण पत्र शामिल हैं। शेवली ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
वहीं, उत्तिया कुंडू खुद को ''बांग्ला अखबार के संपादक, गणित के शिक्षक, प्रेरक वक्ता, आईएसओ ऑडिटर, स्वास्थ्य परामर्शदाता और योग स्वयंसेवक'' बताते हैं। उनकी बताई गई शैक्षणिक योग्यताओं में ''गणित में स्नातकोत्तर'' के साथ-साथ योग प्रशिक्षण, पेशेवर पाठ्यक्रम और ज़मीन की पैमाइश (लैंड सर्वेइंग) से जुड़े कई डिप्लोमा शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के कुछ दिनों बाद, 13 मई को उत्तिया ने अपने फेसबुक पेज पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ''कामना है, आपके संकल्प से बंगाल की धूल का हर कण फिर से जीवंत हो उठे।''
एनसीपीआई का 'राष्ट्रीय संगठन महासचिव' बताने वाले शांतनु डे ने सोमवार को 'पीटीआई-वीडियो' से बातचीत में कहा कि तृणमूल सांसदों की अचानक हुई घोषणा से उन्हें हैरानी हुई, लेकिन उन्होंने पार्टी के संभावित विस्तार पर खुशी जताई।
डे ने कहा, ''अगर लोग हमारे साथ जुड़ते हैं तो यह अच्छी बात है, क्योंकि इससे पार्टी का विस्तार होगा।''
एनसीपीआई नेता ने कहा कि उन्होंने ''सभी पार्टी नेताओं'' से बात की है और संगठन की राय यह है कि कोई भी फैसला सामूहिक रूप से लिया जाना चाहिए।
डे ने कहा, ''अब तक फैसले मैं ही लेता था। अब एक नेतृत्व होगा, लेकिन हम चाहते हैं कि सदस्यों को भरोसे में लेकर ही कोई फैसला लिया जाए।''
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के संविधान के अनुसार उनका कार्यकाल 2027 में समाप्त होगा।
शेवली ने हालांकि दावा किया कि डे पार्टी में किसी पद पर नहीं हैं और वह केवल त्रिपुरा चुनावों के दौरान एनसीपीआई से जुड़े थे।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
1506 1944 दिल्ली