स्वर्ण ऋण बाजार में सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी घटी, निजी बैंक-एनबीएफसी में तेजीः रिपोर्ट
अजय
- 23 Jun 2026, 03:51 PM
- Updated: 03:51 PM
(फाइल तस्वीर के साथ)
मुंबई, 23 जून (भाषा) सोने के बदले कर्ज (स्वर्ण ऋण) के बाजार में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का वर्चस्व धीरे-धीरे घट रहा है, जबकि निजी बैंक एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही हैं। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
क्रेडिट डेटा विश्लेषक फर्म एक्सपीरियन की 'स्वर्ण ऋण बाजार के विकास एवं उपभोक्ता रुझान' शीर्षक से जारी रिपोर्ट कहती है कि बेहतर वितरण नेटवर्क, तेज ऋण स्वीकृति और ग्राहकों की बदलती पसंद स्वर्ण ऋण के कारोबार में आए इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, स्वर्ण ऋण स्रोत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी मार्च तिमाही 2025-26 में घटकर 37 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 45 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर तिमाही 2025-26 में 53 प्रतिशत थी।
इसके विपरीत, एनबीएफसी की इस ऋण बाजार में हिस्सेदारी बढ़कर मार्च तिमाही में 44 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 33 प्रतिशत और सितंबर तिमाही 2024 में 22 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनबीएफसी इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली ऋणदाता श्रेणी बनकर उभरी हैं और उन्होंने हाल की तिमाहियों में लगातार बाजार हिस्सेदारी बढ़ाते हुए मार्च तिमाही 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पीछे छोड़ दिया है।
हालांकि, प्राथमिकता क्षेत्र के स्वर्ण ऋण (पीएसजीएल) खंड में सार्वजनिक बैंक अब भी मजबूत स्थिति में हैं। मार्च तिमाही में इस खंड में उनकी हिस्सेदारी लगभग 88 प्रतिशत रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें दो प्रतिशत की गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में उनके कुल स्वर्ण ऋण स्रोत में पीएसजीएल का योगदान करीब 42 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने व्यापक शाखा नेटवर्क और ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी पहुंच के कारण इस खंड में अग्रणी बने हुए हैं, जबकि निजी बैंक एवं छोटे वित्त बैंक भी कम जोखिम और बेहतर प्रतिफल वाली सुरक्षित खुदरा ऋण परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पीएसजीएल अब ऋणदाताओं के लिए एक स्थिर, विस्तार योग्य और नियामकीय रूप से अनुकूल वृद्धि अवसर के रूप में उभर रहा है। ग्रामीण, कस्बा और कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों से नए ग्राहकों के जुड़ने से इस खंड में वृद्धि को बल मिल रहा है, जिससे वित्तीय समावेशन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
इसके अलावा, स्वर्ण ऋण बाजार में अब उच्च मूल्य वाले कर्ज की तरफ झुकाव देखा जा रहा है। इस क्षेत्र की वृद्धि अब केवल ऋण संख्या बढ़ने से नहीं, बल्कि ऋण की राशि बढ़ने से भी संचालित हो रही है।
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