घबराएं नहीं, सीएसएएस पोर्टल पर अधिकतम विकल्प दर्ज करें: डीयू कुलपति की छात्रों को सलाह
नरेश
- 24 Jun 2026, 05:24 PM
- Updated: 05:24 PM
(श्वेता शर्मा)
नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने बुधवार को छात्रों से अपील की कि वे स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर घबराएं नहीं।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि जब कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (सीएसएएस)पोर्टल की शुरुआत हो, तो अधिक से अधिक पाठ्यक्रमों और महाविद्यालयों का विकल्प दर्ज करें।
सिंह की यह टिप्पणी मंगलवार को संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) 2026 के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद आई है। उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के तहत 12वीं कक्षा में कुछ छात्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन कराए जाने और संशोधित अंक पत्र को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर कहा कि प्रवेश सीयूईटी अंकों के आधार पर मिलेगा, इसलिए छात्रों को घबराने की ज़रूरत नहीं है।
डीयू के कुलपति ने कहा, ''घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। प्रवेश की पूरी प्रक्रिया सीयूईटी में मिले अंकों पर आधारित है। अगर पुनर्मूल्यांकन के बाद 12वीं कक्षा के अंकों में कोई बदलाव होता है, तो छात्र 30 सितंबर तक संशोधित अंकपत्र जमा कर सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर यह मियाद अक्टूबर तक बढ़ायी जा सकती है।''
उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे प्रवेश से जुड़े दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और सीएसएएस पर आवेदन करते समय अधिक से अधिक विकल्पों को दर्ज करें।
सिंह ने कहा, ''कई छात्र महज चार से छह विकल्प चुनने की गलती करते हैं। अगर उन्हें पहले चरण में वे विकल्प नहीं मिलते, तो उन्हें ज़्यादा प्राथमिकताएं न भरने का पछतावा होता है।'' उन्होंने कहा कि छात्रों को ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प चुनने चाहिए क्योंकि वे बाद के चरण में हमेशा विकल्पों को अपग्रेड कर सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया में सीयूईटी के प्रभाव के बारे में सिंह ने कहा कि यह एक 'बड़ा सुधार' है, जिससे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों में विविधता बढ़ी है।
उन्होंने कहा, ''अब देश के लगभग हर राज्य, ज़िले और तहसील से छात्र आ रहे हैं। बड़े शहरों, छोटे कस्बों और गांवों के बच्चे एक समान मंच के जरिये प्रवेश ले रहे हैं।''
सिंह ने कहा कि सीयूईटी ने अलग-अलग स्कूल शिक्षा बोर्ड के मूल्यांकन मानकों में असमानताओं को दूर करने में मदद की है।
उन्होंने कहा, ''पहले प्रवेश 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर होते थे और कुछ बोर्ड अंक देने में ज़्यादा उदार थे, जबकि कुछ बोर्ड ज़्यादा सख़्त थे। सीयूईटी सभी छात्रों के लिए एक समान मंच देता है, जिसे लागू किया गया है और इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।''
सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम के बारे में बताया कि इसे लागू करने के पहले साल में लगभग 30 प्रतिशत योग्य छात्रों ने चौथे साल को चुना।
उन्होंने कहा, ''जो छात्र चौथे साल को चुनते हैं, वे किसी खास उद्देश्य से ऐसा करते हैं। इससे नवोन्मेष, सृजनशीलता और अनुसंधान के अवसर मिलते हैं। हमें उम्मीद है कि इस साल यह संख्या और बढ़ेगी।''
डीयू कुलपति ने कहा कि चार साल का पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्र एक साल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सीधे प्रवेश लेने के लिए भी योग्य हो जाते हैं।
उन्होंने उम्मीदवारों से कहा, ''बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। हम दिल्ली यूनिवर्सिटी में आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।''
भाषा धीरज नरेश
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