छत्तीसगढ़ के एक गांव में ईसाई परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की खबरों के बाद प्रशासन ने दिया दखल
जोहेब
- 25 Jun 2026, 09:49 PM
- Updated: 09:49 PM
नारायणपुर (छत्तीसगढ़), 25 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में ईसाई परिवारों के सामाजिक बहिष्कार और कथित तौर पर उन्हें जगह छोड़ने के लिए कहने की खबरों के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने दखल दिया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और उनसे अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का आग्रह किया। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है।
कुछ ग्रामीणों के अनुसार, ईसाई परिवारों को कथित तौर पर एक महीने में अपने 'मूल धर्म' में लौटने की चेतावनी दी गई है।
नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने 'पीटीआई—भाषा' को बताया कि नारायणपुर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित भरंडा गांव में ईसाई परिवारों के सामाजिक बहिष्कार के बारे में पता चलने के बाद, प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने बुधवार को गांव का दौरा किया और सभी पक्षों से मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपील की।
अधिकारियों को ईसाई परिवारों को कोई औपचारिक चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि ग्रामीण एक महीने में विवाद को सुलझाने की कोशिश करने पर सहमत हुए।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आदिवासी निवासियों और ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों के बीच लगभग एक महीने से तनाव था।
उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में स्थिति तब और बिगड़ गई जब पड़ोसी कोंडागांव जिले से एक महिला और पुरुष कथित तौर पर जड़ी-बूटी वाली दवाएं बेचने के लिए गांव आया। ग्रामीणों ने उन पर धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में उस जोड़े को 22 जून को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि 23 जून को तनाव बढ़ने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दखल दिया और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए ग्रामीणों के साथ बातचीत की।
बुधवार को संवाददाताओं से बात करते हुए भरंडा गांव के सरपंच सुकलु करंगा ने कहा कि ईसाई परिवारों से बार-बार अपने पारंपरिक आदिवासी धर्म और रीति-रिवाजों में लौटने का आग्रह किया गया है।
उन्होंने कहा, "हमने उन्हें कई बार समझाया है कि उन्हें अपने मूल धर्म में लौट आना चाहिए ताकि सभी लोग मिल-जुलकर शांति से रह सकें। उन्हें इस मामले पर सोचने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इस संबंध में ग्राम सभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।"
करंगा ने बताया कि भरंडा गांव में लगभग 120 परिवार हैं, जिनमें से 26 परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। बृहस्पतिवार को संपर्क करने पर उन्होंने साफ किया कि बुधवार को ग्राम सभा में कोई प्रस्ताव पास नहीं किया गया था।
एक अन्य ग्रामीण, रेलू राम कुमेटी ने दावा किया कि कुछ निवासी धर्म परिवर्तन की गतिविधियों से प्रभावित हुए थे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने तय किया है कि आगे कोई कदम उठाने से पहले उन परिवारों को अपने फैसले पर दोबारा सोचने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।
हालात की गंभीरता को देखते हुए तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में बाहरी लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि गांव में स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है।
भाषा सं संजीव जोहेब
जोहेब
2506 2149 नारायणपुर