चीन, बांग्लादेश तीस्ता नदी प्रबंधन पर सहयोग मजबूत करने को सहमत
अविनाश
- 25 Jun 2026, 09:47 PM
- Updated: 09:47 PM
(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 25 जून (भाषा) बांग्लादेश और चीन बृहस्पतिवार को तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने आपसी संबंध मजबूत करने के लिए 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भारत के लिए संवेदनशील है। ऐसे में तीस्ता जल प्रबंधन को लेकर चीन के साथ सहयोग का असर भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर पड़ सकता है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन ने संवाददाताओं को बताया कि अभी बीजिंग में मौजूद रहमान और चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के बीच हुई बैठक में नदियों के जल प्रबंधन में सहयोग पर सहमति बनी।
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी 'बांग्लादेश संगबाद संस्था' (बीएसएस) के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच तीस्ता मास्टर प्लान, नदी प्रबंधन, बाढ़ के जोखिम को कम करने, नदी से गाद निकालने, कटाव को रोकने, सिंचाई और अंतर्देशीय जल परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
बीएसएस की खबर के मुताबिक पांच दिन की चीन यात्रा पर आए रहमान का बाद में 'ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल' में प्रधानमंत्री क्विंग ने औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई और 13 ज्ञापन समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
अमीन ने बताया कि स्वदेश रवाना होने से पहले रहमान का शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करने का कार्यक्रम है।
बीएसएस की खबर के मुताबिक बृहस्पतिवार को चीन के जल संसाधन मंत्री गुओयिंग के साथ हुई बैठक में रहमान ने बांग्लादेश की नदी गाद निकासी परियोजना को रेखांकित किया। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करना है। साथ ही, उन्होंने इस काम के लिए चीन से तकनीकी मदद भी मांगी।
रहमान ने बुधवार को चीन के डालियान शहर में निवेशकों की एक बैठक में बताया कि बांग्लादेश ने एक कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया है। इस योजना में अगले पांच वर्षों में 20,000 किलोमीटर लंबी नदियों और नहरों से गाद निकालना और पद्मा व तीस्ता नदियों में जल प्रबंधन को बेहतर बनाना शामिल है।
बीएसएस की खबर के मुताबिक पिछले महीने जब बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया था, तब रहमान सरकार ने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चीन की भागीदारी और समर्थन मांगा था।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहां यह लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का एक मुख्य स्रोत है।
चीन कई सालों से तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनरुद्धार परियोजना को विकसित करने में दिलचस्पी दिखा रहा है। यह परियोजना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास स्थित है, जो मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
इस पृष्ठभूमि में, भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण संबंधी सहायता की पेशकश की, जो सीमा-पार नदियों के प्रबंधन पर ढाका के साथ सहयोग को और प्रगाढ़ करने की दिल्ली की कोशिशों को दर्शाता है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पानी का बंटवारा एक अहम मुद्दा रहा है। यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल के बंटवारे (खासकर सूखे के मौसम में) को लेकर 1996 में 30 साल के लिए हुई संधि की मियाद इस साल समाप्त होने वाली है।
अमीन ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री रहमान के साथ बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री क्विंग ने बांग्लादेश और चीन के बीच लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक सहयोग, सतत विकास और आपसी समृद्धि के लिए करीबी साझेदारी का आह्वान किया।
पीएमओ के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने राजनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और मजबूत करने में दिलचस्पी दिखाई और बांग्लादेश की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के लिए चीन के समर्थन को दोहराया।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने विकास, निवेश, जन-भागीदारी और पार्टी से पार्टी संबंधों में सहयोग को बढ़ाकर बांग्लादेश-चीन रिश्तों को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने प्रधानमंत्री ली क्विंग के हवाले से कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ मिलकर 'बेल्ट एंड रोड' सहयोग को बेहतर बनाने, बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों के आयात और निवेश करने वाली सक्षम चीनी कंपनियों का समर्थन करने के लिए तैयार है।
क्विंग ने यह भी कहा कि चीन नयी ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना व संचार जैसे उभरते उद्योगों में सहयोग बढ़ाना चाहता है।
शिन्हुआ की खबर के मुताबिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन के साथ संबंध विकसित करना ढाका की विदेश नीति की प्राथमिकता है। रहमान ने यह भी कहा कि उनकी सरकार 'एक चीन' सिद्धांत का सख्ती से पालन करती है और किसी भी तरह की 'ताइवान की आज़ादी' का विरोध करती है।
रहमान इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर मलेशिया गए थे। वह 22 जून को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से चीन के डालियान शहर पहुंचे, जहाँ उन्होंने विश्व आर्थिक मंच के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बुधवार को डालियान से हाई-स्पीड ट्रेन से बीजिंग पहुंचे।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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