कानपुर में फर्जी डिग्री और अंकपत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
राजकुमार
- 03 Jul 2026, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
कानपुर (उप्र), तीन जुलाई (भाषा) कानपुर पुलिस ने शुक्रवार को पूरे देश में फैले फर्जी डिग्री और अंकपत्र बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि यह रैकेट कथित तौर पर दो दर्जन से ज़्यादा राज्यों में चल रहा था तथा इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया एवं उनके पास से नकली दस्तावेज, नकदी और डिजिटल सबूत बरामद किए।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि यह कार्रवाई विशेष जांच दल (एसआईटी) और फीलखाना पुलिस ने मिलकर की, उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि एक संगठित गिरोह विश्वविद्यालय के फर्जी दस्तावेज बनाने और बेचने का काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अमित कुमार सक्सेना (35) और गोपाल गुप्ता (38) के तौर पर हुई है, जबकि इस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड उन्नाव के अखिलेश शुक्ला और उनके भाई निखिलेश अभी फरार हैं।
पुलिस आयुक्त के अनुसार पुलिस ने 59 नकली दस्तावेज बरामद किए, जिनमें कई विश्वविद्यालयों द्वारा कथित तौर पर जारी अंक, 'माइग्रेशन सर्टिफिकेट', 'प्रोविज़नल सर्टिफिकेट' और डिग्रियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, चार एंड्रॉयड फोन और 4.53 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का कई राज्यों में लगभग 500 एजेंट का नेटवर्क था और करीब 500 ग्राहक थे।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की शुरुआती जांच में लगभग 60 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।
लाल ने बताया कि अखिलेश शुक्ला को पहले दिसंबर में लखनऊ की गोमती नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन अप्रैल में ज़मानत मिलने के बाद उसने कथित तौर पर फिर से यह रैकेट शुरू कर दिया।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने कथित तौर पर माना कि वे लगभग एक दशक से नकली डिग्री के कारोबार में शामिल थे और देश भर में लोगों को नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र उपलब्ध करवा रहे थे।
पुलिस उपायुक्त (पूर्व) सत्यजीत गुप्ता ने कहा कि यह गिरोह कथित तौर पर नए बने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश का फायदा उठाकर नकली या हेरफेर किए गए शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करता था।
उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने और नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा कि फीलखाना थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
भाषा सं आनन्द राजकुमार
राजकुमार
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