मृत्यु के चार महीने बाद मणिपुर के भाजपा विधायक वाल्ते का चार जुलाई को होगा अंतिम संस्कार
नरेश
- 03 Jul 2026, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
चूड़ाचांदपुर, तीन जुलाई (भाषा) मणिपुर से भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्ते के पार्थिव शरीर को शनिवार को दफनाया जाएगा। तीन वर्ष पहले राज्य में जातीय हिंसा की शुरुआत के दौरान उनको चोटें आई थीं, जिसके कारण चार महीने पहले उनकी मृत्यु हो गई थी।
जोमी काउंसिल के शुक्रवार को जारी एक बयान के मुताबिक, तानलोन विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे वुंगजागिन वाल्ते को शनिवार को लगभग दोपहर 1:30 बजे चूड़ाचांदपुर जिले के डोरकास वेन्ग गांव स्थित कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।
जोमी समुदाय से आने वाले 61 वर्षीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता के पार्थिव शरीर को फरवरी में दिल्ली से लाए जाने के बाद से चूड़ाचांदपुर जिला अस्पताल में रखा गया था।
मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के दौरान इंफाल के नागामापाल इलाके में भीड़ के हमले में वुंगजागिन वाल्ते गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उपचार के लिए उन्हें दिल्ली ले जाया गया था। करीब दो वर्ष तक इलाज कराने के बाद वाल्ते पिछले वर्ष अप्रैल में अपनी पत्नी के साथ अपने गृह जिले चूड़ाचांदपुर लौट आए थे।
सात फरवरी को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद अगले दिन उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाया गया। 20 फरवरी को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।
समुदाय के सूत्रों के अनुसार, वाल्ते के निधन के बाद जोमी समुदाय के विभिन्न संगठनों ने जोमी कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया ताकि दिवंगत विधायक से जुड़े मामलों की देखरेख की जा सके। इसमें न्याय और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य प्राधिकरणों के साथ संवाद करना भी शामिल था। इसी प्रक्रिया के कारण उनके अंतिम संस्कार में देरी हुई।
सूत्रों ने बताया कि हाल ही में जोमी कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेडसीसी) ने वाल्ते के पार्थिव शरीर को उनके परिजनों को सौंपने का फैसला किया ताकि वे उनको दफना सकें।
सूत्रों ने बताया कि जेडसीसी की प्रमुख मांगों में विधायक पर हुए हमले, जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई, की राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से समयबद्ध जांच कराना शामिल था। इसके अलावा, समिति ने मणिपुर के कुकी-जो बहुल क्षेत्रों को विधानसभा सहित केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की भी मांग की। समिति का मानना था कि समुदाय के समग्र विकास और अन्य समुदायों के बराबर अवसर सुनिश्चित करने का यही एकमात्र रास्ता है।
वाल्ते ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अलग प्रशासन की आवश्यकता और उसके महत्व को स्पष्ट किया था।
मई 2023 से मणिपुर में घाटी में रहने वाले मैइती और पहाड़ी जिलों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
लगातार जारी जातीय संघर्ष और मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसे लगभग एक वर्ष बाद चार फरवरी को हटा लिया गया।
भाषा तान्या माधव नरेश
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